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आरजेडी का विधान परिषद टिकट फाइनल होते ही लालू परिवार में भयंकर विस्फोट, सियासी गलियारों में हड़कंप

बिहार की सियासत में हमेशा से सुर्खियों में रहने वाले लालू प्रसाद यादव के परिवार से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए जैसे ही अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई, वैसे ही लालू परिवार के भीतर एक बड़ा और अप्रत्याशित राजनीतिक विस्फोट हो गया। पार्टी के भीतर टिकटों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रही सुगबुगाहट अब पूरी तरह से पारिवारिक कलह के रूप में सतह पर आ चुकी है। एक राजनीतिक रिपोर्टर की नजर से देखें तो इस पूरे विवाद की धुरी लालू यादव की सबसे चर्चित और एक्टिव बेटी रोहिणी आचार्य बनी हैं। लोकसभा चुनाव में सारण सीट से किस्मत आजमाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि रोहिणी को विधान परिषद भेजा जाएगा, लेकिन आरजेडी की फाइनल लिस्ट में उनका नाम गायब होने के बाद रोहिणी का गुस्सा पूरी तरह से फूट पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऐसा भावुक और तीखा पोस्ट साझा कर दिया है, जिसने न सिर्फ लालू परिवार बल्कि पूरी आरजेडी लीडरशिप को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

उम्मीदवारों की लिस्ट आते ही टूटी रोहिणी आचार्य की उम्मीदें बिहार विधान परिषद की खाली हो रही सीटों के लिए राष्ट्रीय जनता दल ने काफी मंथन के बाद अपने उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाई थी। आरजेडी के रणनीतिकारों ने इस बार नए जातिगत समीकरणों को साधने के चक्कर में कुछ ऐसे चेहरों को तरजीह दे दी, जिससे रोहिणी आचार्य की दावेदारी पूरी तरह से दरकिनार हो गई। सूत्रों की मानें तो रोहिणी और उनके समर्थक यह मानकर चल रहे थे कि पार्टी के प्रति उनके समर्पण और लालू यादव को किडनी डोनेट करने के उनके ऐतिहासिक फैसले के सम्मान में उन्हें इस बार सदन में जरूर भेजा जाएगा। लेकिन जैसे ही आधिकारिक सूची जारी हुई और उसमें रोहिणी का नाम नहीं मिला, तो उनके खेमे में मायूसी के साथ-साथ भयंकर आक्रोश फैल गया।

'अपनों ने ही पीठ में घोंपा खंजर'— रोहिणी आचार्य के पोस्ट से मचा हड़कंप टिकट कटने के कुछ ही मिनटों बाद रोहिणी आचार्य ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक बेहद रहस्यमयी और तल्ख पोस्ट साझा किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि राजनीति में त्याग और ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती, जब आपके अपने ही आपके खिलाफ साजिश रचने लगें। उन्होंने आगे लिखा कि जनता की सेवा के लिए किसी पद की बैसाखी की जरूरत नहीं है, लेकिन अपनों द्वारा की गई अनदेखी सबसे ज्यादा दर्द देती है। हालांकि रोहिणी ने अपने इस पोस्ट में सीधे तौर पर अपने भाई तेजस्वी यादव या मां राबड़ी देवी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह इशारा साफ तौर पर परिवार के भीतर चल रही वर्चस्व की जंग और टिकट वितरण के फैसलों की तरफ था। उनके इस पोस्ट के वायरल होते ही पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है।

तेजस्वी यादव और मीसा भारती के बीच भी संतुलन बनाने की कोशिश नाकाम राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लालू परिवार में चल रही यह अंदरूनी जंग कोई नई नहीं है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इस तरह का असंतोष पहली बार खुलकर सामने आया है। एक तरफ जहां मीसा भारती संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और तेजस्वी यादव बिहार में विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे हैं, वहीं रोहिणी आचार्य भी खुद को राजनीति में स्थापित करने के लिए लगातार जमीन तैयार कर रही थीं। माना जा रहा था कि तेजस्वी यादव इस बार रोहिणी को मौका देकर परिवार के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन पार्टी के भीतर अन्य कद्दावर नेताओं और जातिगत दबाव के चलते वे ऐसा नहीं कर सके, जिसका नतीजा अब इस भयंकर पारिवारिक और राजनीतिक कलह के रूप में सामने आ रहा है।

बीजेपी और जेडीयू को मिला बैठे-बिठाए मुद्दा, आरजेडी डैमेज कंट्रोल में जुटी लालू परिवार के इस अंदरूनी विस्फोट ने विपक्षी खेमे यानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) को बैठे-बिठाए एक बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है। एनडीए के नेताओं ने तुरंत बयान जारी कर तंज कसा है कि जो पार्टी अपने ही परिवार के सदस्यों के साथ न्याय नहीं कर सकती और जहां सिर्फ एक ही भाई का सिक्का चलता हो, वह बिहार की जनता का भला क्या करेगी। दूसरी तरफ, भयंकर फजीहत झेल रही आरजेडी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता तुरंत डैमेज कंट्रोल की कवायद में जुट गए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि रोहिणी आचार्य आरजेडी की एक बेहद सम्मानित और मजबूत स्तंभ हैं और उनकी नाराजगी को जल्द ही बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा। बहरहाल, रोहिणी के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि आगामी दिनों में बिहार के इस सबसे बड़े सियासी कुनबे के भीतर एक नया और बड़ा तूफान आना तय है।

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