Airport Security Tips: एयरपोर्ट चेकिंग में अब नहीं होगी मिनटों की बर्बादी, बैग पैक करने का बदलें तरीका और अपनाएं ये 7 स्मार्ट हैक्स

Airport Security Tips: एयरपोर्ट चेकिंग में अब नहीं होगी मिनटों की बर्बादी, बैग पैक करने का बदलें तरीका और अपनाएं ये 7 स्मार्ट हैक्स

हवाई यात्रा का रोमांच उस वक्त तनाव में तब्दील हो जाता है जब एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच (Security Check) के दौरान लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। अक्सर सुरक्षा कर्मियों द्वारा बैग को दोबारा खुलवाने, सामान को बाहर निकलवाने और फिर से पैक करवाने में न केवल यात्री का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि फ्लाइट छूटने का डर भी सताने लगता है। अधिकांश मामलों में यह देरी कड़े सुरक्षा नियमों की वजह से नहीं, बल्कि यात्रियों द्वारा की गई अव्यवस्थित पैकिंग की वजह से होती है। यदि बैग पैक करते समय अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों और आसान तकनीकों का ध्यान रखा जाए, तो सुरक्षा जांच को बेहद कम समय में और बिना किसी परेशानी के पार किया जा सकता है।

स्मार्ट लेयरिंग तकनीक: एक्स-रे स्कैनर को दें बिल्कुल साफ दृश्य

हवाई अड्डों पर लगे एक्स-रे स्कैनर बैग के भीतर रखी चीजों के घनत्व (Density) के आधार पर रंगों में तस्वीरें दिखाते हैं। जब आप बैग में कपड़े, जूते, धातु की वस्तुएं और बिजली के तारों को बिना किसी क्रम के ठूंस देते हैं, तो स्कैनर स्क्रीन पर एक गहरा और अस्पष्ट पैच बन जाता है। इसे देखकर सुरक्षा अधिकारियों को संदेह होता है और वे बैग को शारीरिक जांच (Physical Inspection) के लिए रोक लेते हैं। इससे बचने के लिए लेयरिंग तकनीक का प्रयोग करें। बैग के सबसे निचले तल पर मुड़े हुए कपड़े रखें, बीच में जूते और भारी सामान व्यवस्थित करें, और सबसे ऊपरी सतह पर उन चीजों को जगह दें जिन्हें जांच के दौरान बाहर निकालने की आवश्यकता पड़ सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और पावर बैंक को रखें सबसे ऊपर या अलग कंपार्टमेंट में

सुरक्षा जांच काउंटर पर सबसे अधिक समय लैपटॉप, टैबलेट, ई-रीडर और कैमरों को निकालने में लगता है। नियमों के मुताबिक, इन बड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बैग से बाहर निकालकर अलग ट्रे में रखना अनिवार्य होता है। यदि लैपटॉप बैग के बीच या नीचे दबा होगा, तो उसे निकालते समय पूरा सामान बिखर जाएगा। हमेशा ऐसे हैंडबैग या बैकपैक का इस्तेमाल करें जिसमें बाहर की तरफ आसानी से खुलने वाली क्विक-एक्सेस लैपटॉप पॉकेट हो। इसके अलावा, एक बात हमेशा याद रखें कि पावर बैंक और अतिरिक्त लिथियम-आयन बैटरियां कभी भी चेक-इन बैगेज (बड़े सूटकेस) में नहीं डाली जाती हैं; इन्हें अनिवार्य रूप से केबिन बैग में ही रखना होता है।

3-1-1 लिक्विड नियम को समझें: पारदर्शी पाउच का करें इस्तेमाल

तरल पदार्थों (Liquids, Aerosols, and Gels) को लेकर विमानन सुरक्षा एजेंसियां सबसे ज्यादा सख्त रहती हैं। केबिन बैगेज में किसी भी तरह का लिक्विड, परफ्यूम, तेल, लोशन, शैम्पू, टूथपेस्ट या सैनिटाइजर 100 मिलीलीटर (100ml) से बड़े कंटेनर में ले जाने की इजाजत नहीं होती है। भले ही 250ml की बोतल में केवल 30ml तरल बचा हो, सुरक्षा कर्मी कंटेनर के आकार को देखकर उसे तुरंत जब्त कर लेते हैं। इसलिए हमेशा 100ml या उससे छोटे ट्रैवल-साइज कंटेनर का इस्तेमाल करें और इन सभी को एक पारदर्शी, सील होने वाले ज़िपलॉक पाउच में रखें। ट्रे में यह पाउच एक बार में बाहर रखा जा सकता है, जिससे बैग को खोलने की नौबत ही नहीं आती।

तारों और चार्जर्स के लिए 'केबल ऑर्गनाइजर' का करें इस्तेमाल

बैग के अंदर उलझे हुए मोबाइल चार्जर, लैपटॉप अडैप्टर, डेटा केबल और ईयरफोन एक्स-रे मशीन में संदिग्ध तारों जैसे नजर आते हैं, जिससे स्कैनर ऑपरेटर को अतिरिक्त जांच करनी पड़ती है। इस समस्या से बचने के लिए एक छोटा केबल ऑर्गनाइजर पाउच साथ रखें। अपने सभी गैजेट्स के तारों और एडॉप्टरों को करीने से लपेटकर उसी पाउच में रखें। इस तरह अलग से रखा गया पाउच स्कैनर में बिल्कुल साफ दिखाई देता है और सुरक्षा अधिकारी बिना समय गंवाए बैग को आगे बढ़ा देते हैं।

एयरपोर्ट ड्रेस कोड: मेटल के सामान और जटिल जूतों से बचें

डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) से गुजरते समय बीप की आवाज बजना जांच प्रक्रिया में देरी का एक बड़ा कारण बनता है। यात्रा के दिन कपड़े और जूते चुनते समय व्यावहारिक बनें। बड़े मेटल बकल वाले बेल्ट, भारी धातु वाले बटन, कड़े, धातु के आभूषण और घड़ियों को सुरक्षा लाइन में लगने से पहले ही उतारकर अपने हैंडबैग की जिप वाली जेब में सुरक्षित रख लें। इसके अलावा, ऐसे जूते पहनने से बचें जिनमें बहुत सारे फीते (Laces) या धातु के बकल हों। आसान स्लिप-ऑन जूते या सामान्य स्नीकर्स हवाई यात्रा के लिए सबसे मुफीद होते हैं, क्योंकि कई एयरपोर्ट्स पर जूते उतारकर स्कैन कराने का नियम भी होता है।

दस्तावेज और बोर्डिंग पास के लिए डेडिकेटेड पॉकेट बनाएं

टर्मिनल के प्रवेश द्वार, सीआईएसएफ चेकपॉइंट और बोर्डिंग गेट पर बार-बार पहचान पत्र (आधार कार्ड या पासपोर्ट) और बोर्डिंग पास दिखाना होता है। अक्सर यात्री लाइन में खड़े होकर अपनी जेबों या बड़े बैग में टिकट और आईडी ढूंढने में उलझ जाते हैं, जिससे पीछे खड़े यात्रियों की कतार भी रुक जाती है। इसके लिए एक छोटा ट्रैवल पाउच, स्लिंग बैग या अपनी जैकेट की सुरक्षित जिप वाली जेब का उपयोग करें, जहां से जरूरी दस्तावेज एक सेकंड में निकाले जा सकें। यदि आप 'डिजी यात्रा' (DigiYatra) की सुविधा का उपयोग करते हैं, तो फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए प्रवेश और सुरक्षा द्वारों पर लगने वाला समय काफी हद तक घट जाता है।

केबिन बैग के वजन और साइज लिमिट का रखें पूरा ध्यान

एयरलाइंस के हैंड बैगेज नियमों (सामान्यतः 7 किलोग्राम तक) का उल्लंघन करने पर कई बार सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद भी एयरलाइन कर्मचारी आपको वापस चेक-इन काउंटर पर भेज देते हैं, जिससे फ्लाइट छूटने का सीधा जोखिम पैदा हो जाता है। घर से निकलने से पहले पोर्टेबल वेइंग स्केल से अपने केबिन बैग का वजन अवश्य जांच लें। बैग को उसकी क्षमता से अधिक न भरें, क्योंकि यदि किसी कारणवश सुरक्षा अधिकारी को बैग खोलना पड़ा, तो अत्यधिक भरे हुए बैग को दोबारा बंद करने में काफी समय और मशक्कत लग जाती है।