भीमलत वॉटरफॉल से किशोर सागर तक, बारिश में हाड़ौती के ये जादुई स्पॉट्स आपका दिल जीत लेंगे
राजस्थान का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में रेतीले धोरे और तपती गर्मी की तस्वीर उभरती है, लेकिन मानसून के दस्तक देते ही इस मरुधरा का एक हिस्सा पूरी तरह से बदल जाता है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़) की, जो इस मौसम में कश्मीर और केरल जैसी हरियाली ओढ़ लेता है। अगर आप इस मानसून में किसी खूबसूरत और शांत जगह पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो हाड़ौती की वादियां, कलकल बहते झरने और ऐतिहासिक झीलें आपकी ट्रिप को बेहद रोमांचक और यादगार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भीमलत वॉटरफॉल: प्रकृति का अद्भुत और डरावना सौंदर्य
हाड़ौती के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक बूंदी जिले में स्थित 'भीमलत वॉटरफॉल' (Bhimlat Waterfall) है। मानसून के दिनों में जब यह झरना लगभग 150 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है, तो इसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है। चारों तरफ फैली घनी हरियाली और पथरीली चट्टानों के बीच से बहता पानी सैलानियों को अपनी ओर खींचता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस झरने का निर्माण महाभारत काल में भीम ने लात मारकर किया था। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मानसून में यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।
किशोर सागर झील और जगमंदिर पैलेस: कोटा की असली शान
अगर आप हाड़ौती ट्रिप पर जा रहे हैं, तो कोटा शहर के बीचोबीच स्थित 'किशोर सागर झील' (Kishore Sagar Lake) देखना बिल्कुल न भूलें। मानसून की हल्की फुहारों के बीच इस झील का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। झील के ठीक बीच में बना ऐतिहासिक 'जगमंदिर पैलेस' पानी पर तैरता हुआ सा प्रतीत होता है। शाम के समय जब यहां ठंडी हवाएं चलती हैं और लाइटिंग की जाती है, तो पानी में महल का प्रतिबिंब देखने लायक होता है। यहां आप बोटिंग का लुत्फ उठाते हुए मानसून की हसीन शाम का आनंद ले सकते हैं।
गैपरनाथ और गरड़िया महादेव: एडवेंचर और आस्था का अनूठा संगम
हाड़ौती का चंबल क्षेत्र अपनी गहरी खाइयों और विहंगम दृश्यों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। कोटा के पास स्थित 'गरड़िया महादेव' (Garadia Mahadev) मंदिर से चंबल नदी का जो 'हॉर्स-शू' (घोड़े की नाल) जैसा घुमावदार नजारा दिखता है, वह मानसून में बादलों के छा जाने पर बेहद जादुई लगता है। इसके अलावा 'गैपरनाथ वॉटरफॉल' और महादेव मंदिर भी गहरी खाई में स्थित हैं, जहां बारिश के दिनों में पहाड़ों से रिसता पानी और झरने का रूप ले लेता है। हालांकि, इन जगहों पर जाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
कैसे पहुंचें और कब जाएं हाड़ौती का दीदार करने
हाड़ौती क्षेत्र सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। कोटा यहां का मुख्य रेलवे जंक्शन है, जहां देश के सभी बड़े शहरों से ट्रेनें आती हैं। हवाई यात्रा के लिए नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर या उदयपुर है, जहां से आप टैक्सी या बस के जरिए आसानी से कोटा या बूंदी पहुंच सकते हैं। जुलाई से सितंबर का महीना यहां घूमने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है क्योंकि इस दौरान सभी नदी-नाले और झरने पूरे उफान पर होते हैं और मौसम बेहद सुहावना रहता है।