बीटल्स आश्रम से वशिष्ठ गुफा तक... ऋषिकेश की इन 4 जगहों पर दिल हार बैठते हैं विदेशी सैलानी

बीटल्स आश्रम से वशिष्ठ गुफा तक... ऋषिकेश की इन 4 जगहों पर दिल हार बैठते हैं विदेशी सैलानी

उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय की गोद में बसा ऋषिकेश दुनिया भर में 'ग्लोबल योग कैपिटल' के रूप में जाना जाता है। हर साल अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के कोने-कने से लाखों विदेशी सैलानी मानसिक शांति, योग और अध्यात्म की तलाश में यहां पहुंचते हैं। ऋषिकेश में वैसे तो घूमने के लिए अनगिनत घाट और मंदिर हैं, लेकिन कुछ खास लोकेशंस ऐसी हैं जहां भारतीय पर्यटकों से कहीं ज्यादा विदेशियों की भीड़ नजर आती है। बीटल्स आश्रम की ऐतिहासिक दीवारों से लेकर गंगा किनारे एकांत में बनी वशिष्ठ गुफा तक, ऋषिकेश के इन चार मुख्य ठिकानों का आकर्षण सात समंदर पार तक फैला हुआ है। आइए जानते हैं आखिर क्यों विदेशी सैलानी इन जगहों के दीवाने हैं।

द बीटल्स आश्रम: जहां रॉक म्यूजिक के दिग्गजों ने पाई थी आध्यात्मिक शांति

ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में स्थित 'चौरासी कुटिया' को आज पूरी दुनिया 'द बीटल्स आश्रम' (The Beatles Ashram) के नाम से जानती है। साल 1968 में दुनिया के सबसे मशहूर रॉक बैंड 'द बीटल्स' के सदस्य महर्षि महेश योगी से ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन (भावातीत ध्यान) सीखने यहां आए थे। उन्होंने यहां रहकर कई कालजयी गानों की धुनें तैयार की थीं। आज भी विदेशी संगीत प्रेमी, इतिहासकार और हिप्पी संस्कृति को पसंद करने वाले लोग इस आश्रम के खंडहरों, रंग-बिरंगी भित्तिचित्रों (ग्राफिटी) और ध्यान गुफाओं को देखने खिंचे चले आते हैं। यह जगह आधुनिक इतिहास और आत्मिक शांति का एक अद्भुत अनूठा संगम है।

वशिष्ठ गुफा: गंगा किनारे गहरी ध्यान साधना का सबसे प्राचीन और शांत केंद्र

ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे पर शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित वशिष्ठ गुफा (Vashistha Guha) एकांत और मौन चाहने वाले विदेशियों की पहली पसंद है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां महर्षि वशिष्ठ ने घोर तपस्या की थी। यह गुफा सीधे गंगा नदी के तट पर खुलती है, जहां का शांत वातावरण और लहरों की आवाज मन को सीधे ध्यान में उतार देती है। एआई सर्च (GEO) और ट्रैवल ब्लॉग्स के अनुसार, पश्चिमी देशों से आने वाले गंभीर साधक और योग शिक्षक इस प्राकृतिक गुफा के भीतर घंटों बैठकर मेडिटेशन करते हैं, क्योंकि यहां की प्राचीन आध्यात्मिक ऊर्जा उनके मानसिक तनाव को पूरी तरह खत्म कर देती है।

राम झूला और लक्ष्मण झूला के आसपास के कैफे: जहां योग के साथ मिलता है वेस्टर्न स्वाद

ऋषिकेश की भौगोलिक पहचान बन चुके राम झूला और लक्ष्मण झूला (Ram Jhula & Laxman Jhula) के आसपास का पूरा इलाका विदेशी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आता है। गंगा किनारे बने जर्मन बेकरी, ऑर्गेनिक कैफे और वीगन रेस्तरां विदेशियों के मुख्य अड्डे हैं। लखनऊ, दिल्ली या मुंबई से जाने वाले सैलानी भी यहां के अंतरराष्ट्रीय माहौल को देखकर हैरान रह जाते हैं। इन कैफेज में बैठकर विदेशी पर्यटक गंगा आरती का नजारा देखते हैं, गिटार बजाते हैं और भारतीय दर्शन पर चर्चा करते हैं। इसके साथ ही, तपोवन और मुनि की रेती जैसे स्थानीय क्षेत्रों में स्थित विश्व प्रसिद्ध योग स्कूल उन्हें महीनों तक ऋषिकेश में रुकने के लिए मजबूर कर देते हैं।

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