32 साल बाद राजस्थान के हिस्से आया यमुना का पानी, जानिए ऐतिहासिक समझौते से लेकर सियासी घमासान तक की पूरी कहानी

32 साल बाद राजस्थान के हिस्से आया यमुना का पानी, जानिए ऐतिहासिक समझौते से लेकर सियासी घमासान तक की पूरी कहानी

राजस्थान के शेखावाटी और मरुस्थलीय इलाकों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। पिछले 32 वर्षों से अधर में लटका हुआ यमुना जल समझौता आखिरकार धरातल पर उतरने के बेहद करीब पहुंच गया है। राज्य की प्यासी धरती और करोड़ों लोगों की उम्मीदों को नया जीवन देते हुए यमुना नदी का पानी राजस्थान लाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। हरियाणा, दिल्ली और केंद्र सरकार के साथ लंबे समय तक चले विचार-विमर्श और हालिया उच्च स्तरीय बैठकों के बाद इस जटिल विवाद का समाधान निकाल लिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जहां एक तरफ प्रभावित जिलों में जश्न का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ इसके राजनीतिक नफे-नुकसान को लेकर सियासी गलियारों में घमासान भी तेज हो गया है।

क्या है 1994 का मूल समझौता और तीन दशकों का इंतजार

यमुना नदी के पानी के बंटवारे को लेकर मूल समझौता साल 1994 में पांच राज्यों— उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत राजस्थान को उसके हक का पानी मिलना तय हुआ था, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी, रूट के निर्धारण पर असहमति और पड़ोसी राज्यों के साथ आपसी तालमेल न बैठ पाने के कारण यह प्रोजेक्ट फाइलों में ही दबा रहा। तीन दशकों से अधिक समय तक राजस्थान के चूरू, झुंझुनूं और सीकर जैसे जिले पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसते रहे और भूमिगत जल स्तर लगातार खतरनाक स्तर तक नीचे गिरता चला गया। अब नए सिरे से हुए तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों ने इस मृतप्राय योजना में नई जान फूंक दी है।

पाइपलाइन से शेखावाटी पहुंचेगा पानी और समझौते पर शुरू हुई सियासत

नए त्रिपक्षीय मसौदे के अनुसार, यमुना के पानी को हरियाणा के रास्ते अंडरग्राउंड पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र तक लाया जाएगा, जिससे पानी की बर्बादी और वाष्पीकरण को रोका जा सके। इस बेहद महत्वाकांक्षी और अरबों रुपये की परियोजना के अमलीजामा पहनते ही राजस्थान में इसका श्रेय लेने की होड़ मच गई है। सत्ताधारी दल इसे अपनी डबल इंजन सरकार की बहुत बड़ी प्रशासनिक और कूटनीतिक जीत बता रहा है, जिसका सीधा फायदा आने वाले चुनावों में किसानों और आम जनता के बीच भुनाने की तैयारी है। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष ने इस समझौते की टाइमिंग और शर्तों पर सवाल उठाते हुए इसे केवल एक चुनावी स्टंट करार दिया है और सरकार से इस परियोजना को पूरा करने की समयसीमा और बजट आवंटन पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

Latest Posts