नैनीताल-भीमताल से हटकर एक्सप्लोर करें ये जादुई हिडन लोकेशन: जहां कम टूरिस्टों की भीड़ और मिलती है बेपनाह शांति
देवभूमि उत्तराखंड (Uttarakhand) का नाम आते ही सबसे पहले पर्यटकों के जेहन में नैनीताल, भीमताल और सातताल जैसी मशहूर झीलों और पर्यटक स्थलों के नाम आते हैं। वीकेंड आते ही इन लोकप्रिय जगहों पर सैलानियों का तांता लग जाता है और यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है। लेकिन अगर आप भागदौड़ और शोरगुल से दूर प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो इन पारंपरिक डेस्टिनेशन से थोड़ा आगे बढ़कर उत्तराखंड की कुछ ऐसी छिपी हुई (Hidden Locations) और अनछुई वादियों का रुख कर सकते हैं, जहां अभी तक आम टूरिस्टों की भीड़ नहीं पहुंच पाई है। इन गुप्त और बेहद खूबसूरत जगहों की सैर करना आपके वेकेशन को एक यादगार अनुभव बना देगा।
खुरपाताल और सातताल से आगे रामगढ़ की मखमली वादियां
नैनीताल की प्रसिद्ध झीलों की सीमा खत्म होने के बाद कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित 'रामगढ़' (Ramgarh) एक ऐसा ही शांत और खूबसूरत पर्वतीय स्थल है। इसे 'फ्रूट बाउल ऑफ कुमाऊं' भी कहा जाता है, क्योंकि यहां सेब, आड़ू और नाशपाती के बड़े-बड़े बाग फैले हुए हैं। मानसून और गर्मियों दोनों ही मौसम में यहां की पहाड़ियों की हरियाली देखने लायक होती है। अगर आप भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत कॉटेज में बैठकर बादलों और पहाड़ों का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो रामगढ़ आपके लिए एक परफेक्ट और अनएक्सप्लोर्ड विकल्प है।
पंगोट और किलबरी: बर्ड वॉचर्स और नेचर लवर्स के लिए जन्नत
नैनीताल से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित 'पंगोट' (Pangot) और 'किलबरी' (Kilbury) के घने जंगल अभी भी मुख्यधारा के पर्यटन की चकाचौंध से काफी हद तक दूर हैं। यह जगह देश-विदेश के बर्ड वॉचर्स और फोटोग्राफर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि यहां सैकड़ों प्रजातियों के दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं। बादलों के बीच घिरे चीड़ और बांज के जंगलों के बीच बने छोटे-छोटे होमस्टे पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाते हैं। यहां का शांत वातावरण और स्थानीय संस्कृति आपको शहर की उलझनों से पूरी तरह आजाद कर देगी।
मुक्तेश्वर के पास छुपा हुआ रहस्यमयी गोपाल और चौकोड़ी का सफर
अगर आप एडवेंचर और ट्रेकिंग के शौकीन हैं, तो मुक्तेश्वर से आगे की ओर स्थित छोटे-छोटे गांव और घाटियां जैसे चौकोड़ी और बिनसर की पहाड़ियां आपका दिल जीत लेंगी। यहां से हिमालय की विशाल बर्फ से ढकी चोटियों (Himalayan Peaks) का जो विहंगम नजारा दिखता है, वह नैनीताल की भीड़ में कभी नहीं मिल सकता। इन इलाकों में कमर्शियल होटलों की जगह स्थानीय लोगों द्वारा चलाए जाने वाले सस्टेनेबल होमस्टे (Homestays) मिलते हैं, जहां आपको पहाड़ी संस्कृति, लोकल खानपान और शुद्ध आबोहवा का असली अनुभव मिलता है।