अरावली की वादियों के बीच तैयार हुआ 16 किलोमीटर लंबा नया वनपथ

अरावली की वादियों के बीच तैयार हुआ 16 किलोमीटर लंबा नया वनपथ

राजस्थान का नाम सुनते ही जहां एक तरफ सुनहरे धोरों और रेगिस्तान की तस्वीर सामने आती है, वहीं दूसरी तरफ यहां के अरावली पर्वतीय क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और ऐतिहासिक दुर्ग पर्यटकों को अपनी ओर खींच लेते हैं। यदि आप भी एडवेंचर, ट्रैकिंग और प्रकृति के बीच समय बिताने के शौकीन हैं, तो आपके लिए एक बेहद रोमांचक खबर सामने आई है। राजस्थान के दो सबसे लोकप्रिय और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों—रणकपुर और कुंभलगढ़—के बीच की दूरी और सफर अब और भी ज्यादा सुहाना और रोमांच से भर गया है। वन विभाग और पर्यटन प्रशासन की पहल पर रणकपुर से कुंभलगढ़ के बीच अरावली की पहाड़ियों के घने जंगलों के बीच से गुजरने वाला 16 किलोमीटर लंबा नया वनपथ (Jungle Trekking Trail) पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। इस नए ट्रैक के शुरू होने से न केवल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक नया और अनूठा अनुभव मिलेगा, बल्कि मेवाड़ और मारवाड़ के इस खूबसूरत क्षेत्र में पर्यटन को भी पंख लगेंगे।

अरावली की वादियों में 16 किलोमीटर का नया जंगल ट्रैक तैयार

रणकपुर अपने विश्व प्रसिद्ध जैन मंदिर और कुंभलगढ़ अपनी ऐतिहासिक दीवार और किले के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। अब तक इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी सड़क मार्ग से तय की जाती थी, लेकिन पर्यटकों की लंबे समय से मांग थी कि इस प्राकृतिक और वन्यजीव क्षेत्र में पैदल यात्रा या नेचर ट्रेल के लिए कोई सुव्यवस्थित मार्ग होना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने अरावली की गोद में लगभग 16 किलोमीटर लंबे इस विशेष वनपथ को विकसित किया है। यह ट्रैक रणकपुर के जंगलों से शुरू होकर कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य (Kumbhalgarh Wildlife Sanctuary) के अंदर से होते हुए कुंभलगढ़ किले तक पहुंचता है। रास्ते में पड़ने वाली गहरी घाटियां, घने जंगल, कलकल करती नदियां और विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे इस सफर को किसी एडवेंचर फिल्म जैसा अहसास कराते हैं।

प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है यह नया रूट

जो लोग भीड़-भाड़ से दूर शांत वातावरण में प्रकृति के करीब वक्त बिताना चाहते हैं, उनके लिए यह 16 किलोमीटर का वनपथ किसी जन्नत से कम नहीं है। इस ट्रैक पर चलते हुए पर्यटकों को अरावली की प्राचीन पहाड़ियों का विहंगम नजारा देखने को मिलता है। रास्ते में कई ऐसी प्राकृतिक जगहें आती हैं जहां बैठकर पर्यटक पक्षियों की चहचहाहट और ठंडी हवाओं का आनंद ले सकते हैं। इस मार्ग पर विभिन्न प्रकार के वन्य जीव-जंतुओं और औषधीय पौधों को भी करीब से देखने का मौका मिलता है। पर्यावरण और वन्यजीव नियमों को ध्यान में रखते हुए इस ट्रैक को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि प्रकृति को कोई नुकसान न पहुंचे और पर्यटक पूरी तरह से सुरक्षित माहौल में ट्रेकिंग का लुत्फ उठा सकें। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि यह ट्रैक राजस्थान को एडवेंचर टूरिज्म के नक्शे पर एक नई पहचान दिलाएगा।

स्थानीय पर्यटन और रोजगार को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा

रणकपुर और कुंभलगढ़ के बीच इस नए जंगल ट्रैक के खुलने से केवल पर्यटकों को ही रोमांचक अनुभव नहीं मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। इस रूट के विकसित होने से आसपास के ग्रामीण इलाकों में होमस्टे, लोकल गाइड, पारंपरिक हस्तशिल्प और फूड स्टॉल्स के बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें। पाली और राजसमंद जिले की सीमा पर स्थित यह क्षेत्र अब तक अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता था, लेकिन इस नए ईको-टूरिज्म प्रोजेक्ट के शुरू होने से यहां पर्यटकों के ठहरने के दिनों में भी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों के चेहरों पर भी खुशी छा गई है।

यात्रा करने से पहले जान लें जरूरी नियम और सुरक्षा के इंतजाम

चूंकि यह 16 किलोमीटर का वनपथ पूरी तरह से कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य के संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कुछ कड़े नियम भी बनाए गए हैं। इस ट्रैक पर अकेले या बिना अनुमति के चलना प्रतिबंधित रहेगा। पर्यटकों को वन विभाग के आधिकारिक पोर्टल या रणकपुर-कुंभलगढ़ टिकट काउंटर से परमिट लेकर ही गाइड के साथ इस ट्रैक पर प्रवेश करना होगा। सुरक्षा के लिहाज से रास्ते में पेट्रोलिंग टीमें तैनात रहेंगी और आपातकालीन सहायता के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सर्दियों का मौसम इस ट्रैक पर घूमने के लिए सबसे बेहतरीन माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान यहां का मौसम सुहाना रहता है और चारों तरफ हरियाली अपने चरम पर होती है। यदि आप भी इस बार राजस्थान घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो रणकपुर से कुंभलगढ़ के इस नए 16 किमी वनपथ की ट्रैकिंग को अपनी विशलिस्ट में जरूर शामिल करें।