VTR में पर्यटन सत्र के पहले दिन ही उमड़ी पर्यटकों की भारी भीड़
बिहार के इकलौते और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बेहद उत्साहजनक और रोमांचित करने वाली खबर सामने आ रही है। पर्यटकों के लंबे इंतजार के बाद जैसे ही इस नए सत्र के लिए वीटीआर के गेट सैलानियों के लिए खोले गए, वैसे ही प्रकृति की गोद में समाए इस रिजर्व में देश के कोने-कोने से पहुंचे पर्यटकों का तांता लग गया। सत्र के पहले ही दिन जंगल सफारी और नेचर ट्रेल का आनंद लेने के लिए भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे, जिससे पूरे वन परिसर में एक अलग ही रौनक देखने को मिली। सबसे खास बात यह रही कि पहले ही दिन कई पर्यटकों को जंगल के राजा कहे जाने वाले रॉयल बंगाल टाइगर (बाघ), तेंदुए, जंगली सुअर और हिरणों के झुंड के बेहद करीब से दीदार हुए, जिन्हें देखकर सैलानी खुशी से झूम उठे और उनके चेहरे पर एक अलग ही रोमांच साफ झलक रहा था।
मानसून ब्रेक के बाद पर्यटकों के लिए खुले वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के दरवाजे
हर साल मानसून के मौसम (बरसात के दिनों) में वन्यजीवों के प्रजनन काल और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश के अधिकांश टाइगर रिजर्व की तरह वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में भी पर्यटकों की एंट्री और जंगल सफारी पर कुछ महीनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इस दौरान जंगल अपनी प्राकृतिक रिकवरी करता है और घास-फूस तथा जल स्रोतों का विकास होता है। इस साल भी मानसून की समाप्ति के बाद प्रशासनिक तैयारियों को पूरा करते हुए जैसे ही वीटीआर के कपाट पर्यटकों के लिए दोबारा खोले गए, वैसे ही टूरिज्म इंडस्ट्री और स्थानीय कारोबारियों ने राहत की सांस ली। पहले दिन पर्यटकों के स्वागत के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने विशेष इंतजाम किए थे, जिसमें पर्यटकों को पर्यावरण संरक्षण और जंगल के नियमों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ उनका पारंपरिक स्वागत भी शामिल था।
पहले ही दिन पर्यटकों को मिले बाघ और वन्यजीवों के शानदार दीदार
जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों का सबसे बड़ा सपना किसी जंगली जानवर, खासकर बाघ को अपनी आंखों से देखने का होता है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व इस मामले में बहुत भाग्यशाली साबित हुआ क्योंकि सत्र के पहले ही दिन जब जिप्सियां जंगलों के अंदरूनी रास्तों (जैसे गोनौली और मंगुराहा रेंज) की ओर बढ़ीं, तो कई भाग्यशाली पर्यटकों को बाघिन और उसके शावकों की कलकारी देखने को मिल गई। इसके अलावा खुले में दौड़ते हुए चीतल, सांभर, भालू और विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे पक्षियों को देखकर सैलानियों ने अपने कैमरों और मोबाइल में इन पलों को हमेशा के लिए कैद कर लिया। पर्यटकों का कहना था कि उन्होंने जितनी उम्मीद की थी, उससे कहीं अधिक रोमांचक अनुभव उन्हें वीटीआर के पहले ही दिन मिल गया, जो उनके पूरे परिवार के लिए एक यादगार ट्रिप बन गया है।
स्थानीय रोजगार और पर्यटन को मिल रही है एक नई रफ्तार
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की यह भारी भीड़ केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए ही खुशी की बात नहीं है, बल्कि यह पश्चिम चंपारण क्षेत्र के स्थानीय लोगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत बड़ा वरदान साबित हो रही है। वीटीआर के खुलने से स्थानीय युवाओं के लिए जिप्सियां चलाने, गाइडिंग करने, होमस्टे संचालित करने और पारंपरिक हस्तशिल्प बेचने के नए अवसर पैदा होते हैं। वन विभाग और जिला प्रशासन भी लगातार यह प्रयास कर रहा है कि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकें ताकि वे बिना किसी परेशानी के प्रकृति का आनंद उठा सकें। इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को बढ़ावा मिलने से न केवल स्थानीय निवासियों की आजीविका चलती है, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति स्थानीय लोगों की जागरूकता भी तेजी से बढ़ती है।
इस सीजन वीटीआर आने का बना रहे हैं प्लान, तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान
यदि आप भी आने वाले छुट्टियों के दिनों में या विंटर सीजन में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व घूमने का मन बना रहे हैं, तो यह समय वहां जाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान यहां का मौसम सुहाना होता है और सुबह-शाम की ठंडक जंगल की सैर के मजे को दोगुना कर देती है। हालांकि, पर्यटकों की भारी मांग को देखते हुए वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन जिप्सारी सफारी की बुकिंग पहले ही कर लेना समझदारी होगी। साथ ही, जंगल के भीतर प्रवेश करते समय प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध और वन विभाग के सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का यह शानदार आगाज इस बात की गवाही देता है कि इस बार का पर्यटन सत्र इतिहास के सबसे सफल सत्रों में से एक होने वाला है।