झारखंड से आज एक ऐसी खबर आई है जो लाखों लोगों के चेहरों पर सुकून वाली मुस्कान ले आएगी
News India Live, Digital Desk : हम सब जानते हैं कि बीमारी सिर्फ शरीर को नहीं तोड़ती, बल्कि घर का बजट भी तोड़ देती है। खासकर जब बात गंभीर बीमारियों की हो, तो गरीब आदमी जांच (Test) के खर्चे से ही डर जाता है। लेकिन, झारखंड की Hemant Soren सरकार ने इस डर को खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
अब राज्य में सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anaemia) और थैलेसीमिया (Thalassemia) के मरीजों को जांच के लिए अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। सरकार ने ऐलान किया है कि इन दोनों बीमारियों की जांच का पूरा खर्चा अब वो खुद उठाएगी।
आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि सरकार के इस फैसले के क्या मायने हैं और इससे आम जनता को कितना फायदा होगा।
अब मुफ्त होगी महंगी जांच
झारखंड, खासकर हमारे आदिवासी भाई-बहनों के बीच सिकल सेल और थैलेसीमिया एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती रही है। ये दोनों खून से जुड़ी बीमारियां (Blood Disorders) हैं, जो अगर समय पर पकड़ में न आएं, तो जानलेवा हो सकती हैं। कई बार परिवार के पास जांच करवाने के पैसे नहीं होते, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।
अब हेमंत सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य का कोई भी मरीज हो, चाहे वो किसी भी वर्ग से आता हो, उसकी सिकल सेल और थैलेसीमिया की टेस्टिंग बिलकुल फ्री (Free) होगी। इसका जो भी बिल बनेगा, वो राज्य सरकार भरेगी।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि झारखंड की एक बड़ी आबादी सुदूर गांवों और पहाड़ों में रहती है। वहां खून की कमी और आनुवंशिक बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है। सिकल सेल एनीमिया में रेड ब्लड सेल्स खराब होने लगते हैं, जिससे बहुत दर्द और कमजोरी होती है। वहीं, थैलेसीमिया में शरीर में खून ठीक से नहीं बनता।
इनकी जांच महंगी होती है, लेकिन अब जब सरकार ने जिम्मेदारी ले ली है, तो उम्मीद है कि गांव-गांव तक मरीजों की पहचान जल्दी हो सकेगी और उन्हें सही समय पर इलाज मिल पाएगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की पहल
सरकार का यह कदम बताता है कि उनका फोकस अब 'बीमार पड़ने के बाद के इलाज' से हटकर 'सही समय पर बीमारी पकड़ने' (Early Detection) पर है। जब जांच मुफ्त होगी, तो लोग हिचकिचाएंगे नहीं और आगे आकर अपना चेकअप करवाएंगे। इससे आने वाली पीढ़ियों को भी इन बीमारियों से बचाने में मदद मिलेगी।
आपका क्या कहना है?
दोस्तों, स्वास्थ्य ही असली धन है। सरकार अगर जनता की सेहत की जिम्मेदारी ले रही है, तो इसकी सराहना होनी चाहिए। इससे उन हजारों परिवारों को राहत मिलेगी जो महंगी मेडिकल फीस के बोझ तले दबे थे।
आपको हेमंत सरकार का यह 'फ्री टेस्टिंग' वाला फैसला कैसा लगा? क्या इससे झारखंड की स्वास्थ्य तस्वीर बदलेगी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें!