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April 12 2026 09:53 am

मेष संक्रांति पर वैधृति योग का साया,अशुभ प्रभाव से बचने के लिए करें ये अचूक उपाय, बरसेगी सूर्य देव की कृपा

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News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में सूर्य का राशि परिवर्तन एक बेहद महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना मानी जाती है। 14 अप्रैल 2026 को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपने उच्च की राशि मेष में प्रवेश करेंगे, जिसे 'मेष संक्रांति' (Mesh Sankranti) कहा जाता है। हालांकि, इस साल मेष संक्रांति पर 'वैधृति योग' का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत अशुभ माना जाता है। इस योग के प्रभाव से कार्यों में बाधा और मानसिक तनाव की स्थिति बन सकती है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, कुछ विशेष उपायों को अपनाकर आप इस नकारात्मकता को दूर कर सकते हैं।

क्या है वैधृति योग और क्यों माना जाता है अशुभ?

वैधृति योग को ज्योतिष के 27 योगों में से एक माना गया है, जिसका स्वामी 'अदिति' को कहा जाता है। मेष संक्रांति के दिन इस योग की उपस्थिति से शुभ कार्यों के फल में कमी आती है। इस दौरान शुरू किए गए कार्यों में असफलता का भय बना रहता है और व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। संक्रांति के पावन काल में इस योग का होना जातकों के लिए सावधानी बरतने का संकेत है।

इन उपायों से दूर होगा 'वैधृति' का दोष

यदि आप इस दिन के अशुभ प्रभावों को कम करना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताए गए इन उपायों को जरूर आजमाएं:

सूर्य देव को अर्घ्य: संक्रांति के दिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और थोड़ा गुड़ डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे कुंडली में सूर्य मजबूत होता है और अशुभ योगों का प्रभाव कम होता है।

दान का महत्व: मेष संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। वैधृति योग के प्रभाव को कम करने के लिए लाल कपड़े, गेहूं, गुड़ और तांबे के बर्तनों का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें।

मन्त्र जाप: इस दिन 'ॐ घृणि सूर्याय नम:' या 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह मानसिक शांति प्रदान करता है और शत्रुओं पर विजय दिलाता है।

पवित्र स्नान: यदि संभव हो तो इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करें। घर में स्नान के पानी में गंगाजल डालकर नहाने से भी शरीर और मन की शुद्धि होती है।

मेष संक्रांति से शुरू होगा 'सौर वर्ष'

मेष संक्रांति से ही हिंदू सौर वर्ष (Solar New Year) की शुरुआत मानी जाती है। कई राज्यों में इसे 'बैसाखी', 'पोइला बैसाख' और 'बिहू' के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, भले ही वैधृति योग का प्रभाव हो, लेकिन सूर्य का अपनी उच्च राशि मेष में होना प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव का संकेत भी देता है। बस जरूरत है तो थोड़े संयम और धार्मिक अनुष्ठान की।