कैसरबाग के तीन मकबरे: एक कहानी प्यार, बदले और बगावत की
लखनऊ के खूबसूरत कैसरबाग इलाके में एक ही अहाते में इतिहास की तीन बिलकुल अलग कहानियां एक साथ दफन हैं. यहाँ अवध के एक नवाब और उनकी बेगम की कब्रें हैं, तो ठीक बगल में उन अंग्रेज सिपाहियों की भी समाधि है जो उनसे लड़ने आए थे. ये तीन स्मारक हैं: सआदत अली खान का मकबरा, उनकी बेगम खुर्शीद जादी का मकबरा, और सैपर्स की समाधि.
बेटे के अजीब बदले की निशानी: सआदत अली खान का मकबरा
कैसरबाग की शान बढ़ाता हुआ यह विशाल मकबरा अवध के चौथे नवाब सआदत अली खान का है. इसे उनके ही बेटे, गाजी-उद-दीन हैदर ने बनवाया था. इस मकबरे की सबसे दिलचस्प बात इसकी कहानी है.
कहते हैं कि जिस जगह आज यह मकबरा है, वहां कभी गाजी-उद-दीन हैदर का अपना महल हुआ करता था, जहाँ वह शहजादे के तौर पर रहते थे. लेकिन जब वह नवाब बने, तो उन्होंने किसी बदले की भावना में अपने ही महल को तुड़वा दिया और उसी जगह पर अपने पिता की कब्र बनवा दी.
यह मकबरा अवधी वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है. इसका शानदार गुंबद और काले-सफ़ेद संगमरमर से बना शतरंज की बिसात जैसा फर्श देखने वालों का मन मोह लेता है. इस मकबरे के तहखाने में नवाब सआदत अली खान के साथ-साथ उनकी तीन बेगमों, बेटियों और परिवार के दूसरे लोगों की भी कब्रें हैं.
इसी आंगन के पूर्वी कोने में एक छोटा और सुंदर मकबरा उनकी पत्नी खुर्शीद जादी का है, जो गाजी-उद-दीन हैदर की माँ थीं.
जब मकबरा बन गया जंग का मैदान
1857 की आजादी की पहली लड़ाई के दौरान यह शांत मकबरा एक खतरनाक जंग का मैदान बन गया था. क्रांतिकारियों ने इस ऊंचे मकबरे के ऊपर तोपें चढ़ा दी थीं और वहां से अंग्रेजी फौज पर गोले बरसा रहे थे, जिससे जनरल हेवलॉक की सेना को आगे बढ़ने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
दुश्मनों की समाधि: सैपर्स टॉम्ब
मुख्य मकबरे के ठीक बगल में रेलिंग से घिरी एक पत्थर की समाधि है, जिसे सैपर्स टॉम्ब कहते हैं. यह उन अंग्रेज सिपाहियों की याद में है जो यहां मारे गए थे. 17 मार्च 1858 को, जब अंग्रेज सैनिक मकबरे पर कब्जा कर रहे थे, तब क्रांतिकारियों द्वारा छोड़े गए बारूद में एक भयानक धमाका हो गया. इस धमाके में ब्रिटिश सेना के रॉयल इंजीनियर्स कंपनी के कई अफसर और सैनिक मारे गए. आज भी यहां लगा एक सफेद संगमरमर का पत्थर उस घटना की गवाही देता है.
आज ये तीनों स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की देखरेख में हैं, जो इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि प्यार, बदले और बगावत की यह अनोखी कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे.