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April 21 2026 09:37 pm

तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक ईरान का मास्टर प्लान, दुनिया की 32% तेल सप्लाई ठप करने की तैयारी सऊदी

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News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से पूरी दुनिया में आर्थिक हाहाकार मच सकता है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान एक ऐसी बड़ी सैन्य रणनीति (Master Plan) पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों को ब्लॉक करना है। अगर ईरान अपने इस मंसूबे में कामयाब होता है, तो दुनिया की लगभग 32 प्रतिशत तेल सप्लाई पूरी तरह से ठप हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग लगनी तय है।

ईरान का 'ट्रिपल स्ट्राइक' प्लान: सऊदी और UAE के तेल ठिकाने निशाने पर

ग्लोबल एक्सपर्ट्स और खुफिया रिपोर्टों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि ईरान केवल समुद्री रास्तों को बंद करने तक सीमित नहीं रहेगा। वह कथित तौर पर तीन प्रमुख तेल इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रों पर एक साथ बड़े हमले की योजना बना रहा है। इसमें सऊदी अरब का यानबू (Yanbu) पोर्ट, यूएई (UAE) का फुजैराह (Fujairah) और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब (Bab-el-Mandeb) शामिल हैं।

फुजैराह दुनिया के सबसे बड़े बंकरिंग केंद्रों में से एक है, जहां से जहाजों को ईंधन की आपूर्ति की जाती है। वहीं यानबू सऊदी अरब का एक प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है। इन पर हमले का मतलब है वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना।

बाब-अल-मंदेब: दुनिया की वो 'गर्दन' जिसे दबोचने की तैयारी में ईरान

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाद अब ईरान की नजर 'बाब-अल-मंदेब' स्ट्रेट पर है। इसे 'आंसुओं का द्वार' (Gate of Tears) भी कहा जाता है। यह रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि अगर उनके हितों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वे इस रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक कर देंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि अकेले इस रास्ते से रोजाना 50-60 लाख बैरल तेल गुजरता है। अगर होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों बंद हो गए, तो दुनिया का करीब एक-तिहाई तेल व्यापार ठप हो जाएगा, जिससे $1 ट्रिलियन (लगभग 94 लाख करोड़ रुपये) का वैश्विक व्यापार दांव पर लग जाएगा।

क्यों मचा है बवाल? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी

इस पूरे तनाव की मुख्य जड़ ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष है। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने उसके खार्ग द्वीप पर कब्जा करने या किसी भी तरह के जमीनी हमले की कोशिश की, तो वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रास्तों को 'नो-गो ज़ोन' बना देगा। उधर, अमेरिका भी अपनी नौसैनिक घेराबंदी मजबूत कर रहा है। इजरायल और ईरान के बीच जारी सीधी जंग ने भी आग में घी डालने का काम किया है।

दुनिया पर क्या होगा असर? भारत भी अछूता नहीं

अगर ईरान अपने इन लक्ष्यों पर हमला करता है, तो इसका सबसे बुरा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। सप्लाई चेन टूटने से न केवल ईंधन महंगा होगा, बल्कि रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी भारी उछाल आएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के जरिए इस महासंकट को टाला जा सकता है या दुनिया एक और बड़े युद्ध की आग में झोंक दी जाएगी।