भारतीय महिला क्रिकेटर्स की कमाई ,पुरुषों के बराबर मैच फीस, पर सैलरी में अब भी है बड़ा अंतर

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News India Live, Digital Desk: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने हाल ही में विश्व कप जीतकर इतिहास रचा है, जिसके बाद से महिला क्रिकेटर्स की कमाई और उनकी सैलरी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए महिला और पुरुष क्रिकेटरों की मैच फीस तो बराबर कर दी है, लेकिन उनकी सालाना सैलरी में अब भी एक बड़ा फासला बना हुआ है। आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।

मैच फीस में पूरी बराबरी

अक्टूबर 2022 में बीसीसीआई ने "पे इक्विटी पॉलिसी" यानी समान वेतन नीति लागू की थी। इस नीति के तहत, अब अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए महिला और पुरुष दोनों क्रिकेटरों को बराबर फीस मिलती है।

  • वनडे (ODI) मैच: ₹6 लाख प्रति मैच
  • टी-20 (T20I) मैच: ₹3 लाख प्रति मैच

यह एक बहुत बड़ा और सराहनीय कदम है, क्योंकि इससे पहले महिला क्रिकेटरों को काफी कम मैच फीस मिलती थी।

सालाना कॉन्ट्रैक्ट (सैलरी) में है बड़ा अंतर

मैच फीस के अलावा, बीसीसीआई अपने प्रमुख खिलाड़ियों को एक सालाना कॉन्ट्रैक्ट भी देता है, जिसे रिटेनरशिप फीस कहा जाता है। यहीं पर महिला और पुरुष क्रिकेटरों की कमाई में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

पुरुष क्रिकेटरों की सालाना सैलरी:

बीसीसीआई पुरुष क्रिकेटरों को चार ग्रेड में बांटता है:

  • ग्रेड A: ₹5 करोड़
  • ग्रेड B: ₹3 करोड़
  • ग्रेड C: ₹1 करोड़

महिला क्रिकेटरों की सालाना सैलरी:

वहीं, महिला क्रिकेटरों के लिए सिर्फ तीन ग्रेड हैं और उनकी सैलरी भी पुरुषों की तुलना में काफी कम है:

  • ग्रेड B: ₹30 लाख
  • ग्रेड C: ₹10 लाख

साफ है कि जहां टॉप पुरुष क्रिकेटर सालाना 7 करोड़ रुपये कमाते हैं, वहीं टॉप महिला क्रिकेटर की सालाना कमाई 50 लाख रुपये है, जो कि 14 गुना कम है।

क्यों है यह अंतर?

इस अंतर के पीछे कई कारण माने जाते हैं, जिनमें पुरुष क्रिकेट से होने वाली व्यावसायिक कमाई, दर्शकों की संख्या और प्रसारण अधिकारों (broadcasting rights) की वैल्यू शामिल है। हालांकि, महिला प्रीमियर लीग (WPL) के आने और विश्व कप जैसी बड़ी जीत के बाद महिला क्रिकेट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है  जिससे भविष्य में इस अंतर के कम होने की उम्मीद की जा सकती है।

संक्षेप में, बीसीसीआई ने मैच फीस बराबर करके एक ऐतिहासिक और सराहनीय कदम उठाया है लेकिन सालाना सैलरी के मामले में सही मायने में बराबरी हासिल करने का सफर अभी बाकी है।