रिजल्ट से पहले RJD में डर का माहौल? तेजस्वी यादव ने सभी उम्मीदवारों को रातों-रात पटना क्यों बुलाया?

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News India Live, Digital Desk: बिहार की छह विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के वोटों की गिनती से ठीक एक रात पहले, आरजेडी (RJD) खेमे में हलचल तेज़ हो गई है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आनन-फानन में उपचुनाव लड़ने वाले पार्टी के सभी छह उम्मीदवारों को पटना तलब कर लिया. राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर हुई इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नतीजों से ठीक पहले ऐसी कौन-सी इमरजेंसी आ गई कि तेजस्वी को यह मीटिंग बुलानी पड़ी?

क्या RJD को सता रहा है 'टूट' का डर?

राजनीतिक जानकार इस बैठक के पीछे कई वजहें मान रहे हैं. सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है RJD के अंदर अपने उम्मीदवारों को लेकर भरोसे की कमी. पार्टी के अंदर एक डर है कि अगर नतीजे उम्मीद के मुताबिक़ नहीं आते हैं या फिर करीबी मुक़ाबले में कोई उम्मीदवार जीतता है, तो कहीं वह पाला न बदल ले.

सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व को इस बात की चिंता है कि कहीं एनडीए (NDA) की तरफ से 'ऑपरेशन लोटस' जैसा कोई खेल न हो जाए. इसलिए, तेजस्वी यादव नतीजों से पहले ही अपने सभी उम्मीदवारों को एक साथ बैठाकर एकजुटता का संदेश देना चाहते हैं.

क्या है मीटिंग का एजेंडा?

इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा था सभी उम्मीदवारों को यह समझाना कि नतीजा चाहे जो भी हो, उन्हें पार्टी के साथ मज़बूती से खड़े रहना है. बैठक में उम्मीदवारों को कुछ ख़ास निर्देश दिए गए:

  • काउंटिंग हॉल में रहें सतर्क: उन्हें मतगणना के दौरान पूरी तरह से सावधान रहने को कहा गया ਹੈ. हर राउंड की गिनती पर बारीकी से नज़र रखने और कोई भी गड़बड़ी दिखने पर तुरंत पार्टी नेतृत्व को सूचित करने का निर्देश दिया गया है.
  • विजय जुलूस पर नज़र: उन्हें यह भी बताया गया है कि 16 नवंबर तक आदर्श आचार संहिता लागू है, इसलिए कोई भी विजय जुलूस न निकाला जाए.
  • एकजुट रहने का मंत्र: सबसे बड़ा संदेश यही था कि जीत हो या हार, सबको पार्टी के फ़ैसले का सम्मान करना है और किसी भी तरह के लालच या दबाव में नहीं आना है

यह बैठक RJD की घबराहट को भी दिखाती ਹੈ और साथ ही तेजस्वी यादव की उस रणनीति को भी, जिसके तहत वह किसी भी तरह की 'हॉर्स ट्रेडिंग' की आशंका को पहले ही ख़त्म कर देना चाहते हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कल जब नतीजे आएंगे, तो तेजस्वी की यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है