TikTok अनइंस्टॉल करने की मची होड़ नई प्राइवेसी पॉलिसी में सेंसिटिव डेटा पर मचा बवाल
News India Live, Digital Desk : दुनिया के सबसे लोकप्रिय शॉर्ट-वीडियो ऐप टिकटॉक के लिए साल 2026 की शुरुआत किसी दुःस्वप्न जैसी रही है। एक तरफ जहां ऐप को अमेरिका में बैन से बचाने के लिए 'अमेरिकन ओनरशिप' (Joint Venture) का सौदा हुआ, वहीं दूसरी तरफ ऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी ने यूजर्स को डरा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नई शर्तों के लागू होने के मात्र 5 दिनों के भीतर अमेरिका में टिकटॉक को अनइंस्टॉल करने वालों की संख्या में 150% का उछाल आया है।
विवाद की वजह: आखिर नई प्राइवेसी पॉलिसी में ऐसा क्या है?
22 जनवरी 2026 को जारी की गई नई प्राइवेसी पॉलिसी में कुछ ऐसी शर्तों का जिक्र है, जिन्हें यूजर्स अपनी निजता (Privacy) पर सीधा हमला मान रहे हैं। पॉलिसी के अनुसार, टिकटॉक अब निम्नलिखित 'सेंसिटिव डेटा' इकट्ठा कर सकता है:
निजी पहचान: जातीय मूल (Racial/Ethnic origin), धार्मिक विश्वास और राजनीतिक झुकाव।
अति-संवेदनशील जानकारी: यौन अभिविन्यास (Sexual Orientation), ट्रांसजेंडर या नॉन-बाइनरी स्टेटस।
कानूनी स्थिति: नागरिकता या आप्रवासन स्थिति (Immigration Status)।
फाइनेंशियल डेटा: बैंक अकाउंट और ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारियां।
सटीक लोकेशन: पहले टिकटॉक केवल अनुमानित लोकेशन लेता था, लेकिन अब यह 'सटीक जीपीएस लोकेशन' (Precise GPS Location) ट्रैक करने का अधिकार मांग रहा है।
चीन बनाम अमेरिका: ओनरशिप बदलने पर भी नहीं थमा डर
टिकटॉक अब अमेरिकी निवेशकों (जैसे Oracle और Silver Lake) के नियंत्रण वाले एक जॉइंट वेंचर के तहत काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि डेटा अब अमेरिका में ही स्टोर होगा, लेकिन यूजर्स का मानना है कि 'चीनी नियंत्रण' से निकलकर अब ऐप 'अमेरिकी निगरानी' (Surveillance) का हथियार बन गया है।"अगर मुझे अपनी निजता और कंटेंट सेंसरशिप के बीच चुनाव करना है, तो मैं ऐप डिलीट करना पसंद करूँगा।" — Dre Ronayne (लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर)
तकनीकी खामियों ने आग में घी डाला
सिर्फ प्राइवेसी ही नहीं, बल्कि ऐप में आई तकनीकी खराबी (Technical Glitches) भी अनइंस्टॉल की बड़ी वजह बनी है:
FYP रीसेट: कई यूजर्स का 'For You' पेज अचानक रीसेट हो गया, जिससे उन्हें उनकी पसंद का कंटेंट दिखना बंद हो गया।
अपलोड फेलियर: क्रिएटर्स ने शिकायत की है कि उनके वीडियो 'जीरो व्यूज' पर अटक रहे हैं या अपलोड ही नहीं हो रहे हैं।
सेंसरशिप के आरोप: आरोप लग रहे हैं कि सरकार विरोधी या संवेदनशील मुद्दों (जैसे जेफ्री एपस्टीन केस) पर बने वीडियो को एल्गोरिदम के जरिए दबाया जा रहा है।
प्रतिद्वंद्वी ऐप्स की चांदी: किसे हो रहा फायदा?
टिकटॉक से मचे इस पलायन (Exodus) का सीधा फायदा अन्य शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म्स को मिल रहा है:
UpScrolled: इसके डाउनलोड में 1000% की वृद्धि देखी गई है।
YouTube Shorts और Instagram Reels: पुराने भरोसेमंद विकल्प होने के कारण लोग इन पर वापस लौट रहे हैं।
Rednote: यह ऐप भी युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।