MVA में एक सीट पर फंसा पेंच उद्धव, पवार और कांग्रेस के बीच बढ़ी रार, क्या राज्यसभा चुनाव से पहले दरक जाएगा गठबंधन
News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। इस बार वजह कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर की 'एक खाली सीट' है। राज्यसभा की इस इकलौती सीट पर दावेदारी को लेकर शिवसेना (UBT), शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस के बीच तकरार तेज हो गई है। महाविकास अघाड़ी के तीनों घटक दल इस सीट को अपने पाले में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, जिससे गठबंधन की एकता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
शिवसेना (UBT) की 'हक' वाली दावेदारी
उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) का तर्क है कि पिछली बार उन्होंने अपने कोटे की सीटें गठबंधन के हित में छोड़ी थीं, इसलिए इस बार इस खाली सीट पर उनका स्वाभाविक दावा बनता है। संजय राउत समेत पार्टी के बड़े नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे इस सीट को लेकर किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं।
कांग्रेस और शरद पवार की अपनी दलीलें
दूसरी ओर, कांग्रेस का मानना है कि विधानसभा में उनके विधायकों की संख्या और जमीनी पकड़ को देखते हुए यह सीट उन्हें मिलनी चाहिए। वहीं, शरद पवार की पार्टी भी पर्दे के पीछे से अपनी बिसात बिछा रही है। पवार गुट का तर्क है कि गठबंधन को मजबूत रखने के लिए एक ऐसे चेहरे की जरूरत है जो दिल्ली में विपक्ष की आवाज को धार दे सके।
सीटों का समीकरण और पेचीदगी
महाराष्ट्र से राज्यसभा की इस एक सीट के लिए होने वाले चुनाव में नंबर गेम बेहद दिलचस्प है। जहां सत्ताधारी महायुति (BJP, एकनाथ शिंदे और अजीत पवार) अपनी रणनीति बना रही है, वहीं विपक्ष (MVA) के पास पर्याप्त आंकड़े जुटाना एक बड़ी चुनौती है। अगर तीनों दलों के बीच सहमति नहीं बनी, तो क्रॉस वोटिंग का खतरा भी मंडरा रहा है, जो भविष्य के विधानसभा चुनावों के लिए घातक साबित हो सकता है।
क्या टूटेगा 'एकजुटता' का भ्रम?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर इस सीट पर बात नहीं बनी, तो सीटों के बंटवारे (Seat Sharing) को लेकर शुरू हुई यह दरार लोकसभा और विधानसभा चुनाव तक खिंच सकती है। उद्धव ठाकरे और शरद पवार के बीच होने वाली आगामी बैठक इस विवाद को सुलझाने की आखिरी उम्मीद मानी जा रही है।