भारत का वो अनोखा शहर, जहां आपको एक भी ट्रैफिक लाइट नहीं मिलेगी!
जब भी हम किसी बड़े शहर की कल्पना करते हैं, तो हमारे दिमाग में ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें और उन सड़कों पर लगी लाल-पीली-हरी बत्तियां यानी ट्रैफिक लाइट्स का ख्याल जरूर आता है। ट्रैफिक सिग्नल पर रुकना और फिर हरी बत्ती का इंतजार करना, हमारी शहरी जिंदगी का एक हिस्सा बन चुका है।
लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है, जहां लाखों गाड़ियां दौड़ती हैं, पर उन्हें कंट्रोल करने के लिए एक भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं है?
जी हाँ, यह कोई कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है। और यह शहर कोई छोटा-मोटा कस्बा नहीं, बल्कि देश भर में 'कोचिंग की राजधानी' के नाम से मशहूर, राजस्थान का कोटा है।
तो फिर यहां ट्रैफिक चलता कैसे है?
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि अगर ट्रैफिक लाइट ही नहीं है, तो भला यहां लाखों गाड़ियों वाला ट्रैफिक कंट्रोल कैसे होता है? क्या यहां जाम नहीं लगता?
इसका जवाब कोटा के बेहतरीन ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान में छिपा है। शहर को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि ट्रैफिक को रुकने की ज़रूरत ही न पड़े, बल्कि वह लगातार एक फ्लो में चलता रहे। इसके लिए शहर में जगह-जगह पर चौराहों यानी सर्कल्स (Circles) का एक बड़ा नेटवर्क बनाया गया है। गाड़ियों को किसी चौराहे पर रुकने की बजाय बस अपनी गति धीमी करनी होती है और सर्कल से घूमकर वे अपने रास्ते पर आगे बढ़ जाती हैं।
और जहां भी ट्रैफिक का दबाव थोड़ा ज्यादा होता है, वहां ट्रैफिक पुलिस के जवान मुस्तैदी से ट्रैफिक को कंट्रोल करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि लाखों की आबादी और हजारों की संख्या में हर साल बाहर से आने वाले छात्रों के बावजूद, यह सिस्टम काफी हद तक सफल है।
यह व्यवस्था कोटा को भारत के बाकी शहरों से बिल्कुल अलग बनाती है और यह साबित करती है कि ट्रैफिक को संभालने के लिए सिर्फ सिग्नल ही एकमात्र उपाय नहीं हैं।