पावन स्वरूपों की गुमशुदगी का सच आएगा सामने? आख़िरकार गिरफ्त में आया मुख्य आरोपी सतविंदर सिंह कोहली

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News India Live, Digital Desk: जब भी हम गुरु घर और मर्यादा की बात करते हैं, तो श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का सम्मान सबसे ऊपर आता है। लेकिन जब खबर मिली कि SGPC के रिकॉर्ड और हकीकत में स्वरूपों की गिनती मेल नहीं खा रही और 328 स्वरूपों का कोई अता-पता नहीं है, तो न केवल सिख संगठन बल्कि हर श्रद्धालु की रूह कांप उठी थी। यह महज़ कागजी हेराफेरी नहीं थी, बल्कि सिख मर्यादा और विश्वास के साथ बड़ा खिलवाड़ था।

कौन है सतविंदर सिंह कोहली और क्या है आरोप?
सतविंदर सिंह कोहली एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने ऑडिट और रिकॉर्ड के दौरान उन स्वरूपों की जानकारी को छुपाने या हेरफेर करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। पुलिस की जांच और विभिन्न जांच समितियों की रिपोर्ट्स में कोहली का नाम प्रमुखता से उभर कर आया था। सालों की लुका-छिपी के बाद आख़िरकार पुलिस की विशेष टीम ने उसे ढूंढ निकाला है।

वो 328 पावन स्वरूप कहाँ गए?
यह सवाल पिछले पाँच सालों से पंजाब की फिजाओं में गूँज रहा है। पंथिक जत्थेबंदियों और संगत ने कई बार इसके लिए प्रदर्शन किए। शुरुआती जांच में सामने आया था कि प्रकाशन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी लापरवाही और मिलीभगत से कई स्वरूपों को बिना उचित रसीद या रिकॉर्ड के वितरित कर दिया था या उनकी गिनती में गोलमाल किया गया था। कोहली की गिरफ्तारी के बाद अब उम्मीद जगी है कि वे साक्ष्य सामने आएंगे जो यह बता सकेंगे कि ये पावन स्वरूप आख़िरकार कहाँ भेजे गए और इसके पीछे की मंशा क्या थी।

प्रशासन और संगत की प्रतिक्रिया
जैसे ही सतविंदर सिंह कोहली की गिरफ्तारी की खबर पंजाब के गलियारों में फैली, लोगों में एक संतोष भरा माहौल दिखा। सिख संगत का लंबे समय से आरोप रहा है कि जाँच की रफ्तार बहुत सुस्त है और 'मगरमच्छ' अभी भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। अब, जब मुख्य कड़ी पुलिस के हाथ लगी है, तो मुमकिन है कि इसमें शामिल कई और सफेदपोश चेहरों के नाम भी सार्वजनिक हों।

आगे की राह
पुलिस अब कोहली को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। यह सिर्फ एक केस नहीं है, बल्कि पंजाब की शांति और सिखों के प्रति जवाबदेही का बड़ा मुद्दा है। 2026 की इस शुरुआत में मिली यह कामयाबी पंजाब पुलिस के लिए भी एक उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि संवेदनशील धार्मिक मामलों को सुलझाना सरकार की साख से जुड़ा होता है।