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March 22 2026 11:29 am

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: ब्रिटेन की एंट्री से भड़का ईरान, डिएगो गार्सिया एयरबेस से मचेगी तबाही?

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मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी की राह मुश्किल नजर आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अब ब्रिटेन ने भी युद्ध के मैदान में सीधी एंट्री मार ली है। ब्रिटिश सरकार द्वारा अमेरिका को अपने रणनीतिक सैन्य बेसों (Military Bases) के इस्तेमाल की हरी झंडी दिए जाने के बाद तेहरान में हड़कंप मच गया है। ईरान ने इस कदम को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए खुलेआम 'विनाशकारी परिणाम' भुगतने की डरावनी चेतावनी दी है।

ब्रिटेन का बड़ा फैसला: एयरबेस और डिएगो गार्सिया का खुलेगा रास्ता

ताजा रणनीतिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिकी वायुसेना को ईरान के खिलाफ 'डिफेंसिव ऑपरेशन्स' के लिए अपने सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। इस फैसले के तहत ग्लॉस्टरशायर स्थित RAF Fairford और हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित सामरिक रूप से अति-संवेदनशील डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) सैन्य बेस अब अमेरिकी बॉम्बर्स के लिए खुल जाएंगे। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन ठिकानों से अमेरिका सीधे तौर पर ईरान की घेराबंदी कर सकता है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर उसका नियंत्रण और मजबूत हो जाएगा।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और तेहरान की 'विनाशकारी' चेतावनी

ब्रिटेन के इस कदम पर ईरान ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में इसे क्षेत्र की शांति के लिए 'ताबूत में आखिरी कील' बताया गया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि ब्रिटेन की धरती या उसके नियंत्रण वाले द्वीपों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए किया गया, तो ब्रिटेन को इसके 'अकल्पनीय परिणाम' भुगतने होंगे। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि विदेशी शक्तियों की क्षेत्र में बढ़ती दखलंदाजी बड़े क्षेत्रीय युद्ध को निमंत्रण दे रही है।

वैश्विक इकोनॉमी पर संकट: सप्लाई चेन और तेल की कीमतों में उछाल का डर

अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते तनाव को तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक के रूप में देख रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और कई यूरोपीय देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि डिएगो गार्सिया जैसे बेस से सैन्य गतिविधियाँ शुरू होती हैं, तो इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और कच्चे तेल के बाजार पर पड़ेगा। हिंद महासागर में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को ठप कर सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग लग सकती है।