Uttar Pradesh : कानपुर की ग्राम प्रधान का शर्मनाक खुलासा ,घर में थार गाड़ी और बंगला, फिर भी लेती हैं मुफ्त राशन, जानें कैसे

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News India Live, Digital Desk: कानपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो सरकारी योजनाओं के गलत इस्तेमाल और 'मुफ्तखोरी' की प्रवृत्ति पर कई सवाल खड़े करता है. जहाँ एक तरफ पात्र लोगों को राशन और अन्य योजनाओं का लाभ मुश्किल से मिलता है, वहीं कुछ लोग जिनके पास पर्याप्त धन और सुविधाएं हैं, वे भी सरकारी सहायता का गलत तरीके से फायदा उठा रहे हैं. इसी कड़ी में कानपुर में एक प्रधान, जिनके बेटे के पास महिंद्रा थार (Mahindra Thar) जैसी लग्जरी एसयूवी है, और खुद उनका भव्य मकान है, फिर भी हर महीने सरकारी मुफ्त राशन योजना का लाभ ले रही हैं.

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, कानपुर में यह चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मौजूदा महिला ग्राम प्रधान (चेयरमैन), जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी है, मुफ्त राशन की सुविधा ले रही हैं. जाँच में पता चला है कि:

  • लक्जरी घर: ग्राम प्रधान का अपना शानदार और विशाल पक्का मकान है, जो उनकी बेहतर आर्थिक स्थिति को दर्शाता है. ऐसे लोगों को आमतौर पर 'गरीब' या 'जरूरतमंद' की श्रेणी में नहीं गिना जाता, जिनके लिए मुफ्त राशन योजना बनी है.
  • बेटे के पास महंगी गाड़ी: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनके बेटे के पास महिंद्रा थार जैसी महंगी और स्टाइलिश एसयूवी है. थार एक प्रीमियम वाहन है, जिसे खरीदना और मेंटेन करना आमदनी वाले व्यक्ति के लिए ही संभव होता है. यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि परिवार गरीबी रेखा से काफी ऊपर है.
  • हर महीने मुफ्त राशन: इन सभी सुख-सुविधाओं के बावजूद, महिला प्रधान हर महीने सरकार द्वारा चलाए जा रहे मुफ्त राशन वितरण योजना का लाभ उठा रही हैं. यह सीधे तौर पर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और योग्य ज़रूरतमंदों के हक़ पर डाका डालने जैसा है.

सरकारी नियमों के विपरीत:

भारत में मुफ्त राशन या बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) कार्ड उन परिवारों के लिए होते हैं जो आर्थिक रूप से कमज़ोर होते हैं और अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं होते. जिनके पास अपना पक्का मकान हो, वाहन हो या निश्चित आय का कोई साधन हो, उन्हें इन योजनाओं का लाभ लेने की अनुमति नहीं होती है. ऐसे मामलों में कार्रवाई का भी प्रावधान है, क्योंकि यह सरकारी योजना के दुरुपयोग के तहत आता है.

इस घटना से स्थानीय प्रशासन और योजना क्रियान्वयन में मौजूद खामियों पर सवाल खड़े होते हैं. उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में उचित कार्रवाई करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में केवल योग्य लोग ही ऐसी योजनाओं का लाभ उठाएं.