The secret of the seventh chapter of the Gita: श्राद्ध पक्ष में इसका पाठ करने से पितरों को मिलती है मोक्ष की राह
- by Archana
- 2025-08-01 12:54:00
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पितरों অর্থাৎ पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित है। इस अवधि में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मकांड किए जाते हैं ताकि हमारे पूर्वजों की आत्मा को शांति और सद्गति प्राप्त हो सके। धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, इन कर्मकांडों के साथ-साथ यदि श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ किया जाए, तो यह पितरों के लिए अत्यंत कल्याणकारी होता है।
श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय को 'ज्ञानविज्ञानयोग' के नाम से जाना जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को ज्ञान, विज्ञान, माया और ईश्वर के वास्तविक स्वरूप के बारे में बताते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान इस अध्याय का पाठ करने और इसके महात्म्य को सुनने से पितरों को सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्ति मिलती है। यह पाठ उनके लिए मोक्ष के द्वार खोलता है और उन्हें अधोगति से निकालकर सद्गति प्रदान करता है।
इस अध्याय का पाठ करने के बाद प्राप्त होने वाले पुण्य फल को पितरों को समर्पित कर देना चाहिए। ऐसा करने से वे तृप्त होते हैं और अपने वंशजों को सुख, समृद्धि, सफलता और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। पितरों के आशीर्वाद से परिवार में खुशहाली आती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।
इसलिए, पितृ पक्ष के 15 दिनों की अवधि में श्राद्ध कर्म के साथ-साथ प्रतिदिन श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना चाहिए। यह न केवल पितरों को शांति प्रदान करता है, बल्कि व्यक्ति को स्वयं भी आत्मज्ञान की ओर अग्रसर करता है और उसके जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
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