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March 18 2026 10:59 pm

जयपुर SMS ट्रॉमा सेंटर में आग लगने से मौतें, क्या लापरवाही थी इसकी असल वजह?

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित SMS ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की एक बेहद दुखद घटना सामने आई है. इस भीषण आग ने न सिर्फ़ अस्पताल में दहशत का माहौल पैदा किया, बल्कि कुछ लोगों की जान भी ले ली. यह घटना बेहद चिंताजनक है क्योंकि यह अस्पताल परिसर में सुरक्षा और इमरजेंसी प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

कैसे हुआ यह दुखद हादसा?
बताया जा रहा है कि SMS ट्रॉमा सेंटर (SMS Trauma Center Jaipur) के किसी एक हिस्से में आग लगी, जिसके बाद धुआं तेजी से फैला. मरीज और उनके तीमारदार जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. अग्निशमन दल ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कुछ मरीज और उनके परिजन इसकी चपेट में आ चुके थे. जो मरीज वेंटिलेटर पर या आईसीयू में थे, उन्हें तत्काल दूसरे वार्डों में शिफ्ट किया गया, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में जो दहशत और परेशानी फैली, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है.

लापरवाही के गंभीर आरोप:
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही इस हादसे का कारण बनी?

  • अग्निशमन व्यवस्था: क्या अस्पताल में अग्निशमन (Fire Safety) के पर्याप्त उपकरण मौजूद थे? क्या कर्मचारियों को आग बुझाने और आपातकाल की स्थिति से निपटने का उचित प्रशिक्षण दिया गया था?
  • निकासी मार्ग (Evacuation Routes): क्या इमरजेंसी में मरीजों और आगंतुकों को सुरक्षित निकालने के लिए स्पष्ट और सुलभ मार्ग उपलब्ध थे? क्या उन पर कोई अतिक्रमण तो नहीं था?
  • मेंटेनेंस: समय-समय पर आग से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं का मुआयना किया जाता है या नहीं?
    ऐसे तमाम सवालों ने जांच अधिकारियों और आम जनता के मन में भी संदेह पैदा कर दिया है. जानकारों का कहना है कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण अस्पताल में ऐसी सुरक्षा चूक अस्वीकार्य है.

मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक, सभी ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही असली कारणों का पता चल पाएगा और दोषी पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद है. इस घटना ने न सिर्फ़ मृतकों के परिवारों को एक गहरा सदमा दिया है, बल्कि अन्य मरीजों और उनके परिजनों को भी अस्पताल में अपनी सुरक्षा को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है. अस्पताल सिर्फ इलाज की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी पर्याय होना चाहिए.