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March 26 2026 07:57 am

यूपी के पशुपालकों की चमकी किस्मत: देसी गाय पालने पर सरकार दे रही ₹80,000 की सब्सिडी, जानें कैसे उठाएं लाभ

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उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अब सफेद क्रांति के साथ-साथ 'देसी क्रांति' की लहर दौड़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश के किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए एक बेहद आकर्षक योजना पेश की है। अब गिर और साहिवाल जैसी उच्च दुग्ध क्षमता वाली देसी नस्ल की गायों को पालने पर सरकार भारी आर्थिक मदद दे रही है। इस पहल के तहत दो गायों की डेयरी यूनिट लगाने पर कुल लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जो अधिकतम 80,000 रुपये तक हो सकता है। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक सुनहरा अवसर बनकर उभरी है।

योजना का मुख्य लक्ष्य: गिर और साहिवाल से बढ़ेगा दूध उत्पादन

इस सरकारी पहल का प्राथमिक उद्देश्य लुप्त होती जा रही भारतीय देसी नस्लों का संरक्षण करना और शुद्ध A2 दूध के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

गिर गाय: मूल रूप से गुजरात की यह नस्ल प्रतिदिन 12 से 20 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है।

साहिवाल गाय: पंजाब और हरियाणा की यह नस्ल कम चारे में भी बेहतरीन दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है और भारतीय जलवायु के प्रति बेहद सहनशील है।

इन गायों का दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग और कीमत सामान्य दूध से कहीं अधिक रहती है। सरकार ने इस योजना के बजट में 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी हैं, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया: बस इन दस्तावेजों की होगी जरूरत

उत्तर प्रदेश का कोई भी निवासी जो पशुपालन में रुचि रखता है, इस योजना का लाभ उठा सकता है। आवेदन के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया और दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

आवश्यक दस्तावेज: आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, निवास प्रमाण पत्र और गौशाला/स्थान का विवरण।

गाय की शर्त: अनुदान केवल उन गायों पर मिलेगा जो पहले, दूसरे या तीसरे ब्यांत (Lactation) में हों।

कैसे करें आवेदन: इच्छुक पशुपालक अपने जिले के नजदीकी मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी (CVO) कार्यालय में जाकर फॉर्म भर सकते हैं या विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। भौतिक सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में भेज दी जाती है।

आय की संभावनाएं: कम लागत में दोगुना मुनाफा

देसी गायें पालना विदेशी नस्लों (जैसे HF या जर्सी) के मुकाबले अधिक फायदेमंद साबित हो रहा है। ये गायें भारतीय वातावरण में कम बीमार पड़ती हैं, जिससे इलाज का खर्च बचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दो उन्नत देसी गायों के जरिए एक पशुपालक महीने में 25 से 35 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत कर सकता है। मेरठ और झांसी जैसे जिलों के कई युवाओं ने इस मॉडल को अपनाकर अपनी मासिक आय को दोगुना करने में सफलता प्राप्त की है। सरकार द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में किसानों को चारे के प्रबंधन और नस्ल सुधार के गुर भी सिखाए जा रहे हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया 'बूस्टर डोज'

यह योजना न केवल दूध की कमी को दूर करेगी, बल्कि गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकने में भी मददगार साबित होगी। जब गांव का युवा अपने ही घर पर 'देसी डेयरी' से अच्छी कमाई करेगा, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्वतः मजबूत होगी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देसी गायों का गोबर और गोमूत्र प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के लिए भी वरदान है, जिससे किसानों की खाद पर होने वाली लागत भी कम होगी।