हंसता-खेलता परिवार और सफर का वो खौफनाक अंत, उदयपुर हाईवे की उस चीख ने सबको झकझोर दिया
News India Live, Digital Desk: जिंदगी भी कितनी अजीब है न! इंसान न जाने अगले पल के लिए कितनी योजनाएं बनाता है, पर कुदरत का फैसला कुछ और ही होता है। आज सुबह राजस्थान के चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाईवे से एक ऐसी खबर आई जिसे सुनकर किसी का भी गला भर आए। हम अक्सर हाइवे पर सफर करते वक्त खुश होते हैं, गाने सुनते हैं, पर वही हाईवे कब 'काल' बन जाए, कोई नहीं जानता।
इस हादसे में मध्य प्रदेश के एक मशहूर बिजनेसमैन के परिवार की खुशियां एक ही पल में बिखर गईं। चलिए, दिल को दहला देने वाली इस घटना के बारे में जानते हैं।
एक पल में सबकुछ बदल गया
खबरों के मुताबिक, यह हादसा तब हुआ जब यह परिवार अपनी कार से सफर कर रहा था। बताया जा रहा है कि गाड़ी की रफ्तार काफी थी और अचानक हाईवे पर किसी भारी वाहन (शायद ट्रक या कंटेनर) से इनकी टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे के बाद जो नज़ारा था, उसे बयान करना भी मुश्किल है। कार लोहे का ढेर बन गई थी और उसमें फंसे लोगों को निकालने में रेस्क्यू टीम के भी पसीने छूट गए।
यादों के सफर से 'मौत' के मंजर तक
बताया जा रहा है कि बिजनेसमैन नरेंद्र गर्ग और उनका परिवार काफी खुशमिजाज था। वे अक्सर अपनी छोटी-छोटी खुशियों को साथ में मनाते थे। उस रात भी वे अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे, उन्हें क्या पता था कि घर की दहलीज अब उनसे हमेशा के लिए दूर हो चुकी है। हादसे में परिवार के 4 से 5 लोगों की जान चली गई। अस्पताल ले जाते वक्त भी उम्मीद की जा रही थी, पर होनी को कुछ और ही मंज़ूर था।
रफ्तार का वो अनकहा कहर
अक्सर हम हाईवे पर अपनी लग्जरी गाड़ियों की रफ़्तार बढ़ा लेते हैं, हमें लगता है कि हमें कुछ नहीं होगा। पर हाइवे के मोड़ और अचानक सामने आने वाले वाहन किसी के भी काबू में नहीं रहते। इस हादसे ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर हमारी सड़कों पर मौत का ये सिलसिला कब थमेगा? क्या रफ़्तार वाकई अपनों की जान से बढ़कर है?
हमारी प्रार्थना और अपील
आज उस घर में जहाँ कल तक चहक थी, आज सिर्फ मातम का सन्नाटा है। इस दुख की घड़ी में हम सब की प्रार्थना उस परिवार के साथ है। यह लेख सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि आप सभी के लिए एक विनम्र अपील भी है कृपया सफर में रफ़्तार से ज्यादा अपनों के इंतजार का ध्यान रखें। घर पर कोई आपकी राह देख रहा है।
सड़क हादसे केवल एक खबर बन कर रह जाते हैं, लेकिन जिस परिवार का 'सिंदूर' उजड़ता है या 'कोख' सूनी होती है, उनकी भरपाई कोई खबर नहीं कर सकती। अपनी और दूसरों की जान का सम्मान करें।