ज़मीन भारत की और फ़ैसला कोई और करे? चीन-पाक की जुगलबंदी पर भारत का अब तक का सबसे कड़ा जवाब

Post

News India Live, Digital Desk : कहते हैं कि पड़ोसी को बदला नहीं जा सकता, लेकिन पड़ोसी जब अपनी हरकतों से बाज़ न आए, तो उसे जवाब देना भी ज़रूरी हो जाता है। अभी हाल ही में चीन और पाकिस्तान ने मिलकर कुछ ऐसी बातें कीं, जिसने भारत के तेवरों को और भी कड़ा कर दिया है। पूरा मामला 'शक्सगाम घाटी' (Shaksgam Valley) और विवादास्पद CPEC प्रोजेक्ट से जुड़ा है।

आखिर हुआ क्या है?
दरअसल, चीन और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी कर अपने तथाकथित 'आर्थिक गलियारे' (CPEC) को बढ़ावा देने की बात कही। अब इसमें नया ये है कि इसमें उन हिस्सों का भी जिक्र है जो हकीकत में भारत का हिस्सा हैं। भारत ने इस पर बिना देर किए साफ़ लफ्जों में कह दिया है कि "बस बहुत हुआ।" विदेश मंत्रालय की ओर से आए बयान ने दुनिया को साफ़ संदेश दिया है कि किसी के कह देने से भारत का इलाका किसी और का नहीं हो जाता।

शक्सगाम घाटी की असली कहानी क्या है?
हो सकता है बहुत से लोगों को यह महज़ एक पहाड़ी इलाके का नाम लगे, लेकिन इसका इतिहास काफी टेढ़ा है। साल 1963 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से इस घाटी को चीन को 'गिफ्ट' की तरह दे दिया था। लेकिन पते की बात ये है कि जिस ज़मीन को पाकिस्तान ने दिया, वो उसकी थी ही नहीं। वह पूरा क्षेत्र केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा है और हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है।

भारत का रुख इतना सख्त क्यों है?
भारत का कहना है कि आप हमारे इलाकों में आकर सड़कें बना रहे हैं या कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चला रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर हमारी संप्रभुता का उल्लंघन है। न तो हम पहले चुप थे और न ही हम अब इसे स्वीकार करेंगे। MEA (विदेश मंत्रालय) ने साफ कर दिया है कि CPEC का कोई भी प्रोजेक्ट अगर भारत की सीमा या पीओके (POK) से होकर गुजरता है, तो वह अवैध है और भारत को अपनी ज़मीन की रक्षा करने का पूरा हक़ है।

अब आगे क्या?
भारत के इस सख्त स्टैंड ने चीन और पाकिस्तान को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पुरानी बातों और पुराने कब्जों को अब भारत हल्के में नहीं लेगा। यह सिर्फ एक डिप्लोमैटिक बयान नहीं है, बल्कि दुनिया को ये बताना है कि भारत अपनी अखंडता से रत्ती भर भी समझौता करने के मूड में नहीं है। अब देखना ये है कि दुनिया के ये दो बड़े मंचों पर 'दोस्त' कहलाने वाले देश, भारत की इस कड़ी फटकार को किस तरह लेते हैं।