ज़मीन की भूख ने बना दिया हैवान लखनऊ से उठाया, मारा और फिर वो किया जिसे सुनकर रूह कांप जाएगी

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News India Live, Digital Desk: हम अक्सर फिल्मों में देखते हैं कि कैसे प्रॉपर्टी और ज़मीन हड़पने के लिए विलेन किसी को गायब कर देता है और सबूत मिटा देता है। लेकिन जब ऐसी ही घटना हमारे आसपास, वो भी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो, तो डर लगना लाज़मी है। ताज़ा मामला इतना शातिराना और दर्दनाक है कि इसे सुनकर पुलिस प्रशासन के भी होश उड़ गए।

लखनऊ से अपहरण, उन्नाव में 'अंत'

कहानी की शुरुआत लखनऊ से होती है, जहाँ ज़मीन के काले कारोबार ने एक सीधे-सादे किसान की जान ले ली। दरअसल, अपराधियों की नज़र किसान की बेशकीमती ज़मीन पर थी। योजना पूरी 'फिल्मी स्टाइल' में बनाई गई थी। पहले किसान का लखनऊ से अपहरण (Kidnapping) किया गया।

परिवार वाले उसे ढूंढते रहे, पुलिस के चक्कर लगाते रहे, लेकिन अपराधी तो कहीं और ही अपना 'काम' तमाम कर चुके थे।

सबूत मिटाने की हद पार

इस अपराध का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि हत्यारों ने किसान को सिर्फ मारा नहीं, बल्कि उनका अस्तित्व मिटाने की पूरी कोशिश की। हत्या के बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए वे उसे लखनऊ से दूर उन्नाव (Unnao) ले गए।

वहां गंगा किनारे या किसी सुनसान जगह पर रातों-रात शव का दाह-संस्कार भी कर दिया गया। उनका मकसद साफ़ था—"न रहेगी बांस, न बजेगी बांसुरी।" यानी अगर लाश ही नहीं मिलेगी, तो मर्डर का केस कैसे साबित होगा? और डीएनए (DNA) टेस्ट किसका होगा? इसे कहते हैं शातिर अपराधी दिमाग।

कैसे खुला राज?

वो कहते हैं न कि अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो, कोई न कोई गलती कर ही देता है। पुलिस ने जब कड़ियाँ जोड़नी शुरू कीं—कॉल डिटेल्स खंगाली और कुछ संदिग्धों को उठाया तब जाकर इस खौफनाक साजिश से पर्दा उठा। जब सच सामने आया कि किसान अब इस दुनिया में नहीं हैं और उनकी चिता तक जल चुकी है, तो परिवार वालों पर क्या गुजरी होगी, इसका अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता।

हम क्या सीख लें?

यह घटना हम सभी के लिए एक 'अलार्म' है। ज़मीन-जायदाद के मामलों में किसी पर भी ज़रूरत से ज्यादा भरोसा करना भारी पड़ सकता है। प्रॉपर्टी डीलर्स के भेष में घूम रहे अपराधी कब किसे अपना शिकार बना लें, कहा नहीं जा सकता।

अगर आपके घर का कोई व्यक्ति किसी जमीन के सौदे (Deal) के लिए जा रहा है, तो कोशिश करें कि वो अकेले न जाए। और हां, अगर कोई लापता हो, तो पुलिस पर तुरंत दबाव बनाएं, क्योंकि शुरुआती 24 घंटे सबसे कीमती होते हैं।

फिलहाल पुलिस आरोपियों की धरपकड़ और बची-कुची कड़ियों को जोड़ने में लगी है, लेकिन एक परिवार ने अपना सबकुछ खो दिया है।