Ayodhya : राम मंदिर का सपना अब पूरी तरह साकार शिखर पर लहराया विजय का निशान

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News India Live, Digital Desk : आपको 22 जनवरी 2024 की वो तारीख याद है? जब रामलला अपने घर लौटे थे। वो अहसास आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। लेकिन दोस्तों, आज यानी 25 नवंबर की तारीख भी इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रही है। आज राम मंदिर का सफर एक नए मुकाम पर पहुँच गया है। पीएम मोदी आज खुद अयोध्या में हैं और राम मंदिर के सबसे ऊंचे शिखर पर ध्वजारोहण कर रहे हैं। इसे आप मंदिर निर्माण की पूर्णता यानी एक तरह से 'फिनाले' मान सकते हैं।

लेकिन आज का दिन ही क्यों?

शायद आपके मन में यह सवाल आए कि आज के दिन में ऐसा क्या खास है? तो आपको बता दें कि आज 'विवाह पंचमी' है। मान्यता है कि त्रेता युग में इसी पवित्र तिथि को भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। सोचिए, जिस दिन राम-सीता एक हुए थे, उसी दिन उनके महल (मंदिर) के शिखर पर पताका फहराई जा रही है। क्या अद्भुत संयोग है!

अभिजीत मुहूर्त: वो जादुई घड़ी

हिन्दू धर्म में मुहूर्त का खेल बहुत बड़ा होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने ध्वजारोहण के लिए जिस वक्त को चुना है, वो है- 'अभिजीत मुहूर्त'। ज्योतिष के जानकार कहते हैं कि भगवान राम का जन्म ठीक इसी नक्षत्र और समय काल में हुआ था। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है, जो किसी भी काम को सफल बनाने की गारंटी देता है। लगभग 44 मिनट का यह वक्त (सुबह 11:45 से दोपहर 12:29 तक) ऊर्जा से भरा होता है। इसी दौरान पीएम मोदी मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर पहुंचकर भगवा ध्वज फहराएंगे।

कैसा है यह ध्वज और इसका महत्व?

यह कोई मामूली झंडा नहीं है। बताया जा रहा है कि यह 11 किलो का विशाल भगवा ध्वज है। इस पर भगवान सूर्य का प्रतीक, कोविदार वृक्ष और 'ओम' बना हुआ है। पुराने समय में किसी किले या महल के ऊपर ध्वज फहराने का मतलब होता था कि "काम पूरा हो गया है और अब यहाँ धर्म का राज है"। आज वही रस्म अयोध्या में निभाई जा रही है। इसे कई लोग 'दूसरी प्राण-प्रतिष्ठा' भी कह रहे हैं क्योंकि गर्भगृह में तो भगवान विराजमान हो गए थे, लेकिन आज पूरा मंदिर, उसका शिखर और उसका तेज दुनिया के सामने पूर्ण रूप से आ रहा है।

माहौल में घुली भक्ति

अयोध्या का नजारा देखने लायक है। सुरक्षा तगड़ी है, चप्पे-चप्पे पर पहरा है, लेकिन राम भक्तों का उत्साह उससे कहीं ज्यादा ऊंचा है। लेजर शो हो रहे हैं, फूलों की सजावट ऐसी है जैसे साक्षात देवलोक उतर आया हो। पीएम मोदी पहले सप्त मंदिर और अन्य देव स्थानों पर शीश झुकाएंगे और फिर वो पल आएगा जिसका सबको इंतजार है।

यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि सदियों के संघर्ष, धैर्य और आस्था के पूर्ण होने का उत्सव है। हम सब इस ऐतिहासिक पल के गवाह बन रहे हैं, इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है