सिर्फ टैक्स की बात नहीं, अब होगी इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांति बजट से पहले बिल्डरों और दिग्गजों ने सरकार को दी ये बड़ी सलाह
News India Live, Digital Desk: बजट की सुगबुगाहट शुरू होते ही हर कोई अपनी-अपनी 'विशलिस्ट' यानी मांगों की सूची तैयार करने लगता है। इस बार रीयल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विशेषज्ञों ने सरकार को एक बड़ा सुझाव दिया है। उनकी सलाह है कि अगर देश को तेज़ी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना है, तो सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च को सीधा दोगुना कर देना चाहिए, यानी इसे लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े तक ले जाना चाहिए।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये 3 लाख करोड़ रुपये आम आदमी के लिए क्या मायने रखते हैं? असल में इसे ऐसे समझिएजब सरकार सड़कों, पुलों, एयरपोर्ट्स और नई मेट्रो लाइन्स पर ज़्यादा पैसा खर्च करती है, तो उसके आस-पास के इलाकों में रियल एस्टेट यानी घरों और फ्लैट्स की मांग खुद-ब-खुद बढ़ जाती है। अगर कनेक्टिविटी अच्छी होगी, तो लोग शहर के बाहर सस्ते घर खरीदना पसंद करेंगे, जिससे मिडिल क्लास को सीधा फायदा होता है।
इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि पिछला कुछ समय रियल एस्टेट के लिए बहुत अच्छा रहा है, लेकिन अब इसे एक नए 'पुश' की ज़रूरत है। उनका मानना है कि अगर सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर पैसे बढ़ाती है, तो इससे न सिर्फ नए रोज़गार पैदा होंगे, बल्कि घर बनाना और खरीदना भी थोड़ा आसान हो सकता है।
बजट 2026 को लेकर बिल्डरों की भी अपनी उम्मीदें हैं। वे चाहते हैं कि घरों पर मिलने वाले लोन के ब्याज में कुछ अतिरिक्त रियायत मिले ताकि जो लोग अपना पहला घर खरीदना चाह रहे हैं, उन्हें थोड़ा संबल मिले। फिलहाल सारा दारोमदार अब वित्त मंत्रालय पर है। क्या सरकार इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर का पिटारा पूरी तरह खोल देगी? या फिर संतुलित रास्ता अपनाया जाएगा?
सड़कों का जाल बिछने से लेकर किफायती घरों तक, हम सबकी नजरें अब फरवरी के पहले हफ्ते पर टिकी हैं। आपका इस बारे में क्या मानना है? क्या सरकार को सड़कों और इमारतों पर इतना बड़ा निवेश करना चाहिए या आम आदमी को सीधे कैश का फायदा मिलना चाहिए?