जोधपुर का वो खौफनाक सच जिसने रिश्तों पर से भरोसा उठा दिया ,रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो कहाँ जाएं बेटियाँ?
News India Live, Digital Desk: आज एक ऐसी खबर लिख रहा हूँ जिसे साझा करते हुए कलम भी कांप रही है। हम अक्सर फिल्मों में या कहानियों में सुनते हैं कि 'खून का रिश्ता' सबसे बड़ा होता है, और एक पिता अपनी बेटियों की ढाल होता है। लेकिन जोधपुर से जो हकीकत सामने आई है, उसने इस पवित्र रिश्ते के भरोसे को चकनाचूर कर दिया है।
सोचकर देखिये, एक बेटी जिसे लगता है कि उसका पिता दुनिया का सबसे सुरक्षित इंसान है, वही अगर उसके साथ दरिंदगी करे तो वह किससे कहेगी?
12 साल तक जारी रहा ये खौफनाक सिलसिला
मामला जोधपुर का है, जहाँ एक पिता पिछले 12 सालों से अपनी ही सगी बेटियों को अपनी हवस का शिकार बना रहा था। ये कोई एक-दो दिन की बात नहीं थी, बल्कि यह सिलसिला एक दशक से ज्यादा समय तक चला। उस घर की दीवारों ने न जाने कितनी चीखें दबाई होंगी। वह पिता अपनी दोनों बेटियों को डरा-धमकाकर उनके साथ गलत काम करता रहा।
हिम्मत की दाद देनी होगी!
शायद आप सोचें कि ये लड़कियां चुप क्यों रहीं? दरअसल, वो इतनी डरी हुई थीं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे इस हैवानियत से कैसे बाहर निकलें। लेकिन कहते हैं न कि पाप का घड़ा एक न एक दिन ज़रूर भरता है। आख़िरकार, बड़ी बहन ने अपनी छोटी बहन की सुरक्षा और खुद को इस नरक से निकालने के लिए चुप्पी तोड़ी। जब पूरा सच माँ के सामने आया और पुलिस तक बात पहुँची, तो सब सन्न रह गए।
पुलिस की कार्रवाई और न्याय की आस
जोधपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन ऐक्शन लिया और उस शख्स को धर दबोचा। आरोपी अब सलाखों के पीछे है और उस पर पोक्सो (POCSO) एक्ट जैसी सख्त धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अब पूरा शहर और लोग यही मांग कर रहे हैं कि ऐसे इंसान को समाज में रहने का कोई हक़ नहीं है और उसे कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए।
मेरा और आपका नज़रिया
ये घटना हमें ये सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे आस-पास ऐसे कितने ही मासूम होंगे जो शायद आज भी किसी ऐसी खौफनाक चुप्पी का हिस्सा होंगे। ऐसी दरिंदगी के लिए सिर्फ़ 'कानून' नहीं, बल्कि 'इंसानी जज्बात' मर चुके हैं। हम सबको मिलकर ये सुनिश्चित करना होगा कि हमारे बच्चे सुरक्षित रहें और हम उन्हें इतना भरोसा दिलाएं कि वे किसी भी गलत हरकत पर फौरन आवाज़ उठा सकें।
उन बेटियों की हिम्मत को सलाम है जिन्होंने इस शैतान के चेहरे से नकाब उतारा। भगवान उन्हें इस दर्द से उभरने की शक्ति दे।