GST पर अब तक का सबसे बड़ा 'ऑपरेशन'! वित्त मंत्री ने दिए संकेत, किसानों-मध्यम वर्ग को मिलेगी भारी राहत
महंगाई की मार झेल रहे देश के आम आदमी, किसानों और छोटे कारोबारियों (MSMEs) के लिए केंद्र सरकार की तरफ से अब तक की सबसे बड़ी खुशखबरी आने के संकेत मिले हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सिस्टम में सुधारों का दूसरा चरण ("GST 2.0") शुरू होने जा रहा है, जिसका मुख्य और एकमात्र लक्ष्य आम जनता पर पड़ने वाले टैक्स के बोझ को कम करना और कर प्रणाली को सरल बनाना है।
यह ऐलान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिनों में GST काउंसिल की बैठक में कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए जा सकते हैं। इन फैसलों में न केवल टैक्स की दरों में बड़ा फेरबदल (GST Rate Rejig) शामिल है, बल्कि उर्वरक (Fertilizers) और दवाओं जैसी अति-आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स को बहुत कम या पूरी तरह से शून्य करने पर भी विचार किया जा रहा है। अगर ऐसा होता हैं तो यह महंगाई के खिलाफ लड़ाई में मोदी सरकार का सबसे बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' साबित हो सकता है।
आम आदमी, किसान और MSMEs... किसको, क्या मिलेगा फायदा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से इन तीन वर्गों पर फोकस किया है, जिन्हें इन सुधारों से सीधी राहत मिलेगी:
1. आम आदमी और मध्यम वर्ग:
- क्या होगा फायदा?: वित्त मंत्री ने कहा कि सुधारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टैक्स का बोझ आम आदमी और मध्यम वर्ग पर कम से कम पड़े। इसका मतलब है कि दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं, जो वर्तमान में 12% या 18% के स्लैब में आती हैं, सस्ती हो सकती हैं। जीवन रक्षक दवाओं पर भी GST की दरें घटाई जा सकती हैं।
2. देश का अन्नदाता - किसान:
- सबसे बड़ी राहत: किसानों के लिए सबसे बड़ी खबर उर्वरकों पर GST को लेकर है। वर्तमान में उर्वरकों पर 5% जीएसटी लगता है, जो किसानों की इनपुट लागत को बढ़ाता है। वित्त मंत्री ने संकेत दिए हैं इस दर को और कम करने या पूरी तरह से खत्म करने पर विचार किया जा रहा है। इससे सीधे तौर पर किसानों की खेती की लागत कम होगी और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। कृषि उपकरणों पर भी राहत मिल सकती है।
3. छोटे और मझोले कारोबारी (MSMEs):
- क्या होगा फायदा?: MSMEs के लिए सबसे बड़ी चुनौती जटिल GST अनुपालन (Compliance) रही ਹੈ। GST 2.0 में टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को और सरल बनाने, कागजी कार्रवाई को कम करने और छोटे कारोबारियों के लिए नियमों को आसान बनाने पर जोर दिया जाएगा। इससे उन्हें अपना व्यापार चलाने में आसानी होगी।
क्या है सरकार का 'GST 2.0' का मास्टर प्लान? (स्लैब में हो सकता है महा-बदलाव)
सात साल पहले लागू हुए जीएसटी सिस्टम को अब और तर्कसंगत बनाने की तैयारी है। इसके तहत जो सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है, वह है GST स्लैब का विलय।
- मौजूदा स्लैब: 5%, 12%, 18% और 28%
- संभावित बदलाव: सूत्रों के मुताबिक, सरकार 12% और 18% के स्लैब को मिलाकर 15% का एक स्टैंडर्ड स्लैब बनाने पर विचार कर रही है। इससे कई वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी जो अभी 18% में हैं (जैसे साबुन, टूथपेस्ट), लेकिन कुछ वस्तुएं महंगी भी हो सकती हैं जो अभी 12% में हैं (जैसे बटर, घी)। 5% के स्लैब को भी बदलकर 7-8% किया जा सकता है, लेकिन इसमें से कई ज़रूरी वस्तुओं को हटाया जा सकता है।
पेट्रोल और डीजल का क्या होगा?
'GST 2.0' की चर्चा के साथ ही, पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। इस पर वित्त मंत्री ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि इसका प्रावधान कानून में पहले से मौजूद ਹੈ, और इस पर अंतिम फैसला GST काउंसिल में सभी राज्यों को मिलकर ही लेना होगा।
अगली जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं सबकी निगाहें
वित्त मंत्री का यह बयान स्पष्ट रूप से यह दर्शाता हैं सरकार अब आम आदमी को महंगाई से राहत देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यह सुधार न केवल करोड़ों लोगों की जेब का बोझ हल्का करेंगे, बल्कि अर्थव्यवस्था में खपत (Consumption) को भी बढ़ावा देंगे। अब पूरे देश की निगाहें जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां इन क्रांतिकारी प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा और आम आदमी की 'GST वाली दिवाली' का रास्ता साफ होगा।