साल की वो एक रात जब चांद से बरसता है ‘अमृत’! जानें कब है शरद पूर्णिमा और क्यों खास है इसकी खीर
साल में एक रात ऐसी आती है जब आसमान का चांद अपनी 16 कलाओं से पूरा होता है, जब धरती उसके सबसे करीब होती है, और जब उसकी दूधिया रोशनी में अमृत के गुण समा जाते हैं। यह जादुई और पवित्र रात है शरद पूर्णिमा की!
यह वो रात है जिसका हम सब बेसब्री से इंतजार करते हैं, जब घरों की छतों पर चांदी के बर्तनों में खीर बनाकर रखी जाती है, इस उम्मीद और विश्वास के साथ कि चांद की किरणें इस खीर को ‘अमृत’ बना देंगी।
लेकिन इस साल, तिथियों के फेर के कारण लोगों के मन में थोड़ा कन्फ्यूजन है कि आखिर शरद पूर्णिमा है कब? 5 अक्टूबर को या 6 अक्टूबर को?
दूर कर लें सारा कन्फ्यूजन: यह है सही तारीख और समय
- शरद पूर्णिमा की सही तारीख: इस साल शरद पूर्णिमा کا व्रत 6 अक्टूबर 2025, सोमवार کو رکھا جائے گا।
- पूर्णिमा तिथि कब से कब तक: पूर्णिमा तिथि 5 अक्टूबर की रात 09:51 से शुरू होगी और 6 अक्टूबर की रात 11:21 पर समाप्त होगी।
- तो 6 अक्टूबर ही क्यों? हिंदू धर्म में कोई भी त्योहार उदया तिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) के अनुसार मनाया जाता है। 6 अक्टूबर को ही उदया तिथि में पूर्णिमा है और चांद भी पूरी रात पूर्णिमा का ही रहेगा। इसलिए व्रत रखने और खीर बनाने के लिए 6 अक्टूबर का दिन ही सबसे उत्तम है।
क्यों है इस रात की खीर ‘चमत्कारी’?
इसके पीछे सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि विज्ञान भी है।
- आस्था कहती है: शरद पूर्णिमा की रात को ही माँ लक्ष्मी का जन्म हुआ था और वे पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। साथ ही, इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है।
- विज्ञान कहता है: इस रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है, जिससे उसकी किरणों का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। जब खीर को चांदी के बर्तन में रखा जाता है, तो चांदी (जो एक जीवाणुरोधी धातु है) के गुण भी उसमें आ जाते हैं और यह खीर सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बन जाती है।
माना जाता है कि यह खीर आंखों की रोशनी बढ़ाने, त्वचा में निखार लाने और सांस (अस्थमा) से जुड़ी बीमारियों में बहुत फायदेमंद होती है।
कैसे रखें छत पर खीर? (सबसे सरल विधि)
- शाम को गाय के दूध में चावल और मिश्री डालकर खीर बनाएं।
- इसे किसी चांदी, मिट्टी या कांसे के बर्तन में निकालें।
- अब बर्तन को एक पतले जालीदार कपड़े से ढक दें ताकि उसमें कुछ गिरे नहीं, पर चांद की रोशनी सीधी पड़े।
- इसे 6 अक्टूबर की रात को अपनी छत या बालकनी में ऐसी जगह रखें जहां चांद की रोशनी सबसे ज्यादा आती हो। इसे कम से कम 3-4 घंटे रखें।
- अगली सुबह, इस ‘अमृत’ वाली खीर को सबसे पहले माँ लक्ष्मी को भोग लगाएं और फिर प्रसाद के रूप में पूरे परिवार के साथ खाएं।
तो, 6 अक्टूबर को यह मौका बिल्कुल भी न चूकें और इस दिव्य रात का पूरा लाभ उठाएं।