पोस्टपार्टम का वो अकेलापन और हनुमान चालीसा का सहारा ,परिणीति चोपड़ा ने शेयर की अपनी ये बहुत निजी कहानी

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News India Live, Digital Desk : मां बनना हर औरत के लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास होता है, लेकिन इस खूबसूरती के पीछे कई बार वो संघर्ष भी छिपा होता है जिसे अक्सर दुनिया देख नहीं पाती। हाल ही में परिणीति चोपड़ा ने अपनी 'पोस्टपार्टम' (बच्चे के जन्म के बाद की स्थिति) जर्नी के बारे में कुछ ऐसी बातें शेयर की हैं, जो न केवल प्रेरणा देती हैं बल्कि हर उस नई मां के दिल को छू जाती हैं जो इस दौर से गुज़र रही हैं।

सिर्फ खुशी नहीं, चुनौतियां भी आईं सामने
परिणीति ने खुलकर बताया कि मां बनने के बाद शुरुआती कुछ महीने उनके लिए मानसिक रूप से काफी उतार-चढ़ाव वाले रहे। हॉर्मोनल बदलाव, रातों की नींद खराब होना और नई जिम्मेदारियों का बोझ—इन सबने उन्हें कई बार बेचैन कर दिया। वह दौर ऐसा था जब ग्लैमर की चमक-धमक बहुत दूर थी और असली जद्दोजहद मन की शांति को लेकर थी। अक्सर नई माताओं के साथ यह समस्या होती है जिसे लोग "बेबी ब्लूज़" या 'पोस्टपार्टम डिप्रेशन' भी कह देते हैं, लेकिन लोग इसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

कैसे मिली राहत? हनुमान चालीसा ने दिया साथ
अपनी इस मुश्किल घड़ी और मन की उलझन को सुलझाने के लिए परिणीति ने किसी आधुनिक तकनीक से ज़्यादा अध्यात्म और विश्वास पर भरोसा किया। परिणीति ने खुलासा किया कि जब भी उन्हें घबराहट या मानसिक तनाव महसूस होता था, तो वह 'हनुमान चालीसा' का पाठ करती थीं। उन्होंने बताया कि इस पाठ के गूँजने मात्र से ही उनके भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता था। परिणीति का मानना है कि हनुमान चालीसा की एक-एक पंक्ति उन्हें वह हिम्मत और शांति देती थी, जिसकी एक नई मां को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।

अकेलेपन से बाहर आने का रास्ता
परिणीति कहती हैं कि हम अक्सर शारीरिक सेहत की तो बात करते हैं, लेकिन बच्चे के होने के बाद माँ की जो दिमागी स्थिति होती है, उस पर चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने हर नई माँ को यह सलाह दी है कि वह अपनी पसंद का कोई भी काम करें जिससे उन्हें शांति मिले—चाहे वो मेडिटेशन हो, किताबें पढ़ना हो या भगवान का नाम लेना। परिणीति के लिए वो 'चालीसा' सिर्फ एक पाठ नहीं, बल्कि सुकून पाने का एक ज़रिया बन गई।