TATA ने iPhone बनाने के लिए झोंके 1,500 करोड़, Apple के गेम प्लान से उड़ी ड्रैगन की नींद
News India Live, Digital Desk : ग्लोबल सप्लाई चेन के नक्शे पर भारत अब अपनी ऐसी धाक जमा रहा है, जिससे पड़ोसी देश चीन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। दिग्गज भारतीय समूह टाटा (Tata Group) ने आईफोन मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में ₹1,500 करोड़ का एक ऐसा दांव खेला है, जो भारत को 'ग्लोबल टेक हब' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह निवेश महज एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि चीन के उस दबदबे को सीधी चुनौती है, जो दशकों से स्मार्टफोन असेंबली पर राज कर रहा था।
पेगाट्रॉन के साथ हाथ मिलाते ही बदली तस्वीर
टाटा संस ने अपनी यूनिट 'टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स एंड सॉल्यूशंस' की अधिकृत पूंजी को ₹3,500 करोड़ से बढ़ाकर सीधे ₹6,250 करोड़ कर दिया है। आपको बता दें कि यह वही यूनिट है, जिसने पिछले साल दिग्गज आईफोन मेकर पेगाट्रॉन (Pegatron) की भारतीय यूनिट में 60% की बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। टाटा के इस मास्टरस्ट्रोक ने साफ कर दिया है कि कंपनी अब आईफोन मैन्युफैक्चरिंग को उस स्तर पर ले जाना चाहती है, जहां अभी तक सिर्फ फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन जैसी विदेशी कंपनियों का नाम चलता था।
निवेश में तूफानी तेजी: FY26 का बड़ा टारगेट
टाटा ग्रुप ने इस निवेश की रफ्तार को कम नहीं होने दिया है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में अब तक कुल ₹3,000 करोड़ का निवेश किया जा चुका है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टाटा अपनी वित्तीय ताकत को कई गुना बढ़ा रहा है ताकि बड़े स्तर पर प्रोडक्शन शुरू किया जा सके। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने अपनी अधिकृत पूंजी को बढ़ाकर ₹20,000 करोड़ कर दिया था, जो भविष्य के बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोजेक्ट्स की नींव है।
अमेरिका में बिकने वाले 70% आईफोन अब 'मेड इन इंडिया'
एप्पल और भारत की जुगलबंदी अब रंग ला रही है। हालिया रिपोर्ट्स के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में बिकने वाले लगभग 70% आईफोन अब भारत में ही तैयार हो रहे हैं। टाटा और फॉक्सकॉन जैसी कंपनियों की मदद से एप्पल अपनी निर्भरता चीन से घटाकर तेजी से भारत की ओर शिफ्ट कर रहा है। टाटा की इस एंट्री ने एप्पल को एक भरोसेमंद और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर दे दिया है।
घाटे से मुनाफे की ओर: टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की छलांग
कंपनी की बैलेंस शीट भी अब मजबूती की गवाही दे रही है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की ऑपरेटिंग इनकम में जो उछाल आया है, वह अविश्वसनीय है। वित्त वर्ष 2024 में जो इनकम ₹3,752 करोड़ थी, वह वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर सीधे ₹66,206 करोड़ के पार पहुंच गई है। वहीं, कंपनी का घाटा जो पहले ₹825 करोड़ था, वह अब सिमटकर मात्र ₹69 करोड़ रह गया है। यह आंकड़े बताते हैं कि टाटा अब प्रॉफिटेबिलिटी के बेहद करीब है।
सेमीकंडक्टर की दुनिया में भी टाटा का डंका
सिर्फ फोन असेंबल करना ही टाटा का लक्ष्य नहीं है। कंपनी गुजरात में लगभग 14 बिलियन डॉलर की लागत से एक विशाल 'फेब्रिकेशन प्लांट' (Fab Plant) लगाने की तैयारी में है। इसके साथ ही असम में एक हाई-टेक चिप असेंबली और टेस्टिंग यूनिट पर भी काम चल रहा है। टाटा का यह विजन भारत को न केवल स्मार्टफोन बल्कि चिप मैन्युफैक्चरिंग में भी आत्मनिर्भर बनाने का दम रखता है।