T20 World Cup 2026 : चेपॉक में अब ओस का डर खत्म अमेरिका से मंगाया गया खास मैजिकल केमिकल

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News India Live, Digital Desk :  क्रिकेट के खेल में अक्सर 'ओस' (Dew) दूसरी पारी में गेंदबाजी करने वाली टीम की दुश्मन बन जाती है। गेंद गीली होने के कारण स्पिनर्स और तेज गेंदबाजों के लिए उसे पकड़ना (Grip) मुश्किल हो जाता है। लेकिन चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम (Chepauk) में भारत और ज़िम्बाब्वे के बीच होने वाले मुकाबले में ऐसा नहीं होगा।

TNCA ने अमेरिका से एक विशेष 'एंटी-ड्यू' केमिकल (Anti-Dew Chemical) मंगाया है, जिसका छिड़काव पूरे मैदान पर किया गया है।

क्या है यह 'यूएस इम्पोर्टेड' केमिकल और कैसे करता है काम?

यह एक खास तरह का सर्फेक्टेंट (Surfactant) है, जिसे अक्सर गोल्फ कोर्स और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैदानों में इस्तेमाल किया जाता है।

काम करने का तरीका: यह केमिकल घास की पत्तियों पर एक अदृश्य फिल्म (Invisible Layer) बना देता है। इससे ओस की बूंदें घास पर टिकने के बजाय सीधे जमीन (मिट्टी) में समा जाती हैं।

फायदा: इससे आउटफील्ड पूरी तरह सूखी रहती है। दूसरी पारी में भी गेंद गीली नहीं होती, जिससे गेंदबाजों को वही ग्रिप मिलती है जो पहली पारी में थी।

टॉस का 'बॉस' बनना अब मुश्किल!

आमतौर पर चेपॉक जैसे मैदानों पर कप्तान टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना चुनते हैं ताकि बाद में ओस का फायदा उठा सकें।

बदलाव: इस केमिकल के इस्तेमाल के बाद अब 'टॉस जीतो, मैच जीतो' वाला समीकरण कमजोर पड़ जाएगा।

बराबरी का मौका: अब बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच मुकाबला बराबरी का होगा। स्पिनर्स के लिए मशहूर चेपॉक की पिच पर अब रविचंद्रन अश्विन और कुलदीप यादव जैसे खिलाड़ी दूसरी पारी में भी अपनी फिरकी का जादू दिखा सकेंगे।

चेपॉक का नया अवतार: 2026 वर्ल्ड कप की तैयारी

चेन्नई का यह मैदान हमेशा से स्पिन का मददगार रहा है। इस नई तकनीक के साथ, ICC और BCCI यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वर्ल्ड कप के बड़े मैचों का फैसला किस्मत (टॉस) के बजाय खेल के कौशल (Skill) से हो।

फीचरबिना केमिकल केकेमिकल के साथ
गेंद की ग्रिपफिसलन भरी (दूसरी पारी)सूखी और स्थिर
फील्डिंगगीली घास पर मुश्किलआसान और सुरक्षित
स्पिनरों का रोलकम प्रभावीपूरे मैच में प्रभावी