Supreme Court : क्या आप चिड़ियाघर जाकर जानवरों के साथ खेल सकते हैं? एल्विश यादव केस में वकील पर भड़का सुप्रीम कोर्ट
News India Live, Digital Desk : एल्विश यादव के खिलाफ सांपों के जहर के इस्तेमाल और वन्यजीवों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का सख्त तेवर देखने को मिला। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) का हवाला देते हुए आरोपी के वकील से तीखे सवाल पूछे।
"वन्यजीव खिलौने नहीं हैं": कोर्ट की बड़ी टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान जब एल्विश यादव के पक्ष ने दलीलें देनी शुरू कीं, तो कोर्ट ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए वन्यजीवों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया।
तर्क पर सवाल: कोर्ट ने वकील से पूछा, "क्या आप चिड़ियाघर जा सकते हैं और वहां जानवरों के साथ खेल सकते हैं? क्या कानून इसकी अनुमति देता है?"
नियमों की अनदेखी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों को केवल मनोरंजन का साधन या 'खिलौना' नहीं समझा जा सकता। अगर कोई व्यक्ति प्रतिबंधित प्रजातियों के साथ वीडियो बनाता है या उनके साथ छेड़छाड़ करता है, तो यह कानून का सीधा उल्लंघन है।
सोशल मीडिया रसूख: अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले लोग (Influencers) अक्सर व्यूज के लिए वन्यजीव कानूनों की अनदेखी करते हैं।
क्या है पूरा मामला?
सांपों के जहर की सप्लाई: एल्विश यादव पर रेव पार्टियों में सांपों का जहर सप्लाई करने और उनके व्यापार में शामिल होने का आरोप है।
FIR और गिरफ्तारी: नोएडा पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की थी और एल्विश को जेल भी जाना पड़ा था।
PMLA की जांच: प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है कि क्या सांपों के जहर के अवैध धंधे से काली कमाई की गई।
एल्विश की मुश्किलें बढ़ीं या कम हुईं?
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने संकेत दिया है कि वह वन्यजीवों के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
बचाव पक्ष की दलील: वकील ने तर्क दिया था कि एल्विश का इरादा कोई अपराध करना नहीं था, लेकिन कोर्ट ने कानून की बारीकियों पर जोर दिया।
नतीजा: फिलहाल यह मामला कानूनी दांव-पेंच में फंसा हुआ है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से एल्विश की कानूनी चुनौतियों में इजाफा हो सकता है।