झारखंड हाईकोर्ट की कड़ी फटकार कुछ लोग राज्य में समानांतर सरकार चलाना चाहते हैं, कानून-व्यवस्था पर जताई गहरी चिंता
News India Live, Digital Desk : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था और विशेष रूप से संथाल परगना क्षेत्र में हो रही जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे कुछ तत्व झारखंड में एक 'समानांतर सरकार' (Parallel Government) चलाने की कोशिश कर रहे हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि संविधान के दायरे से बाहर किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के पीछे के 3 मुख्य कारण
अवैध घुसपैठ का मुद्दा: कोर्ट ने संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण बदलती आबादी पर चिंता जताई। कोर्ट का मानना है कि इससे स्थानीय आदिवासियों के अधिकार और राज्य की सुरक्षा खतरे में है।
समानांतर सत्ता का आभास: कोर्ट ने उन क्षेत्रों की ओर इशारा किया जहाँ सरकारी तंत्र के बजाय कुछ खास समूहों या सिंडिकेट का प्रभाव ज्यादा दिखता है, जो अपने नियम थोपने की कोशिश करते हैं।
पुलिस और प्रशासन की शिथिलता: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि गंभीर शिकायतों के बावजूद प्रशासन अपेक्षित कार्रवाई करने में विफल रहा है।
सुनवाई की मुख्य बातें (Key Highlights of the Hearing)
| विषय | कोर्ट का निर्देश/टिप्पणी |
|---|---|
| घुसपैठ की जांच | केंद्र और राज्य सरकार मिलकर घुसपैठियों की पहचान के लिए ठोस तंत्र बनाएं। |
| आदिवासी अधिकार | जनसांख्यिकीय बदलाव से आदिवासियों की जमीन और संस्कृति को बचाने के लिए कड़े कदम उठाएं। |
| संवैधानिक मर्यादा | राज्य में केवल संविधान का शासन चलेगा, किसी 'समानांतर' शक्ति का नहीं। |
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है:
विपक्ष (BJP): भाजपा ने इसे राज्य सरकार की विफलता बताया है। पार्टी का कहना है कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण आज झारखंड घुसपैठियों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है।
सत्ता पक्ष (JMM/Congress): सरकार का तर्क है कि वह कानून के अनुसार काम कर रही है और सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार (BSF) की है।
क्या होता है 'समानांतर सरकार' का मतलब?
कानूनी शब्दावली में जब कोई समूह, संगठन या माफिया सरकारी मशीनरी को दरकिनार कर अपने नियम लागू करने लगता है, वसूली करता है या न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देता है, तो उसे 'समानांतर सरकार' कहा जाता है। कोर्ट की यह टिप्पणी राज्य सरकार के लिए एक बड़े 'सेंस्योर' (निंदा) के समान है।
अगली कार्रवाई: कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में एक विस्तृत शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह बताना होगा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।