3 साल से थे टीम से बाहर, मोहम्मद शमी के संन्यास पर टीम इंडिया के कोच ने दिया बड़ा बयान
भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास में अपनी रिवर्स स्विंग, सटीक लाइन-लेन्थ और अपनी सधी हुई गेंदबाजी से दुनिया भर के दिग्गज बल्लेबाजों के छक्के छुड़ाने वाले स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की खबरों और चर्चाओं ने पूरे खेल जगत में एक गहरी मायूसी फैला दी है। पिछले लगभग तीन वर्षों से राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे मोहम्मद शमी के करियर को लेकर क्रिकेट गलियारों में लंबे समय से तरह-तरह की कयासबाजियां लगाई जा रही थीं। चोटों से उबरने और घरेलू क्रिकेट में वापसी की तमाम कोशिशों के बावजूद राष्ट्रीय चयनकर्ताओं द्वारा लगातार नजरअंदाज किए जाने के बाद शमी के इस बड़े कदम ने हर क्रिकेट प्रशंसक का दिल छोटा कर दिया है। भारतीय टीम को अपने दम पर अनगिनत यादगार मैचों और वनडे वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले इस दिग्गज तेज गेंदबाज के जाने से भारतीय पेस अटैक के एक बेहद स्वर्णिम और सफल युग का औपचारिक अंत हो गया है।
'शमी जैसे गेंदबाज रोज पैदा नहीं होते, उनका संन्यास भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा नुकसान': मुख्य कोच की भावुक प्रतिक्रिया
मोहम्मद शमी के संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी और अपनी भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की। कोच ने शमी के योगदान को याद करते हुए कहा कि मोहम्मद शमी भारतीय क्रिकेट के सबसे महान और निस्वार्थ तेज गेंदबाजों में से एक रहे हैं और उनका खेल से दूर जाना पूरी टीम और देश के लिए बेहद दुखद क्षण है। कोच ने कहा कि लगभग 3 साल तक टीम से बाहर रहने के बावजूद शमी का समर्पण कभी कम नहीं हुआ था। उन्होंने हमेशा युवा पेसर्स का मार्गदर्शन किया और ड्रेसिंग रूम का माहौल हल्का बनाए रखा। कोच के अनुसार, 'सीम प्रेजेंटेशन' के मामले में मोहम्मद शमी पूरी दुनिया में अद्वितीय थे और उनकी जैसी कला हर किसी के पास नहीं होती। जब भी टीम को किसी भी प्रारूप में विकेट की सख्त जरूरत होती थी, शमी सबसे आगे खड़े नजर आते थे। उनका यह योगदान आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा की तरह रहेगा।
वनडे वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन से लेकर टेस्ट क्रिकेट में धाक तक: याद किया जाएगा शमी का शानदार करियर
उत्तर प्रदेश के अमरोहा से निकलकर भारतीय टीम के मुख्य पेस अटैक का चेहरा बनने वाले मोहम्मद शमी का अंतरराष्ट्रीय करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। भारत के लिए सभी तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और टी20) में घातक गेंदबाजी करने वाले शमी ने खास तौर पर आईसीसी वनडे विश्व कप और रेड-बॉल (टेस्ट) क्रिकेट में भारत की सफलता की नई इबारत लिखी। जसप्रीत बुमराह और ईशांत शर्मा के साथ मिलकर उन्होंने विदेशों में भारतीय टेस्ट टीम की तेज गेंदबाजी क्रांति की मजबूत नींव रखी थी। वर्ल्ड कप के मुकाबलों में भारत के लिए सबसे तेज 50 विकेट चटकाने और एक ही मैच में 7 विकेट लेने जैसा ऐतिहासिक कारनामा करने वाले शमी की कमी हमेशा मैदान पर महसूस की जाएगी। हालांकि वे अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नीली जर्सी में खेलते नहीं दिखेंगे, लेकिन क्रिकेट प्रशंसक और पूर्व दिग्गज खिलाड़ी हमेशा उनके इस अतुलनीय और शानदार करियर को सम्मान के साथ याद रखेंगे।