नीतीश कुमार रेड्डी का बड़ा खुलासा, चोट के दर्द और नेगेटिविटी से निपटने का बताया अनोखा फॉर्मूला
भारतीय क्रिकेट टीम के युवा और प्रतिभाशाली ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी ने चोट के बाद मैदान पर अपनी धमाकेदार वापसी और उस मुश्किल दौर के अनुभवों के बारे में खुलकर बातचीत की है। हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए दूसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में अपनी बेहतरीन गेंदबाजी और शानदार प्रदर्शन से महफिल लूटने वाले नीतीश ने उन तमाम चुनौतियों का जिक्र किया है जिनसे उन्हें रिहैबिलिटेशन के दौरान गुजरना पड़ा था। क्रिकेट प्रेमियों और खेल जगत में उनके इस संघर्ष और वापसी की चर्चा जोरों पर है, क्योंकि एक ऑलराउंडर के रूप में अपने वर्कलोड को मैनेज करना और बार-बार चोटिल होने के बाद खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। नीतीश ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और सकारात्मक सोच के दम पर इस कठिन समय का डटकर सामना किया और भारतीय टीम में एक बार फिर से अपनी उपयोगिता साबित की।
पहला मैच खराब रहने के बाद दूसरे मैच में मिला जरूरी आत्मविश्वास
अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती दौर में ही अपनी खास पहचान बनाने वाले नीतीश कुमार रेड्डी ने बताया कि चोट के बाद जब कोई खिलाड़ी मैदान पर वापसी करता है, तो उसे सबसे ज्यादा मानसिक सहारे और आत्मविश्वास की जरूरत होती है। अफगानिस्तान के खिलाफ खेली जा रही इस सीरीज के पहले टी20 मैच में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था, जिससे उन्हें थोड़ी निराशा जरूर हुई थी, लेकिन उन्होंने अपनी कमियों से सीख ली और दूसरे मैच में शानदार वापसी करते हुए मात्र 24 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट झटके। उनके इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' के पुरस्कार से भी नवाजा गया। नीतीश ने इस सफलता का पूरा श्रेय भारतीय टीम के मैनेजमेंट को दिया है, जिन्होंने मुश्किल समय में भी उन पर पूरा भरोसा बनाए रखा और उन्हें अपने खेल पर खुलकर फोकस करने की पूरी आजादी दी।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COI) में बिताए दिनों और मानसिक थकान का किया जिक्र
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा शेयर किए गए एक खास वीडियो इंटरव्यू में नीतीश कुमार रेड्डी ने बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COI) में बिताए गए अपने रिहैबिलिटेशन के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि शारीरिक रूप से चोट से उबरना जितना कठिन होता है, उससे कहीं अधिक मानसिक रूप से मजबूत रहना चुनौतीपूर्ण होता है। लगातार ट्रेनिंग और आधुनिक सुविधाओं के बीच रहने से कई बार खिलाड़ियों को मानसिक थकान का सामना करना पड़ सकता है। इस मानसिक थकान से निपटने के लिए नीतीश ने अपने दोस्तों से रोज बातचीत करने और समय मिलने पर एक-दो दिन के लिए अपने घर जाने का सहारा लिया, जिससे उन्हें तरोताजा होने में काफी मदद मिली। उनका मानना है कि एक पेशेवर खिलाड़ी के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
ऑलराउंडर के रूप में वर्कलोड और चोट लगने पर महसूस होने वाले दर्द पर बोले नीतीश
एक तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में खेलने वाले नीतीश कुमार रेड्डी अच्छी तरह जानते हैं कि उनके ऊपर गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों का दोहरा कार्यभार रहता है, जिसकी वजह से उनके शरीर पर वर्कलोड बहुत ज्यादा होता है। उन्होंने माना कि करियर के इस पड़ाव पर चोटों से निपटना बेहद निराशाजनक हो सकता है और जब कोई खिलाड़ी कड़ी मेहनत के बाद भी चोटिल हो जाता है, तो अंदर से बहुत बुरा लगता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे बुरे समय में आपकी सोच ही आपको आगे बढ़ाती है। खिलाड़ी को यह समझना बेहद जरूरी है कि नकारात्मकता और नकारात्मक लोगों को कभी भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि सकारात्मक सोच और सही दिशा में किया गया निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है।