नीरज चोपड़ा का भाला बना रोहित यादव की ताकत: एशियन गेम्स के मेडलिस्ट ने किया बड़ा खुलासा

नीरज चोपड़ा का भाला बना रोहित यादव की ताकत: एशियन गेम्स के मेडलिस्ट ने किया बड़ा खुलासा

भारतीय एथलेटिक्स जगत से इस वक्त एक बेहद प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आ रही है। देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने वाले ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का प्रभाव सिर्फ उनके खुद के पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनका बड़प्पन और खेल के प्रति समर्पण अब देश के अन्य उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए भी बहुत बड़ी ताकत बनता जा रहा है। भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और एशियन गेम्स के पदक विजेता रोहित यादव ने हाल ही में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। रोहित ने बताया है कि कैसे कठिन समय और प्रैक्टिस के दौरान नीरज चोपड़ा का अपना व्यक्तिगत भाला (Javelin) उनकी सबसे बड़ी ताकत बना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। इस खुलासे के बाद से खेल प्रेमियों के बीच नीरज चोपड़ा की खेल भावना और सहकर्मियों के प्रति उनके दोस्ताना रवैये की चारों तरफ जमकर तारीफ हो रही है।

जब प्रैक्टिस के दौरान नीरज चोपड़ा ने अपने खास भाले से रोहित यादव को मैदान पर उतारा

खेल के मैदान पर अक्सर खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखा जाता है, लेकिन भारतीय एथलेटिक्स में सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के बीच का यह आपसी भाईचारा और सहयोग इस खेल को एक अलग ही ऊंचाई पर ले जाता है। रोहित यादव ने एक इंटरव्यू के दौरान साझा किया कि जब वे अपने खेल के एक बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे थे और उन्हें बेहतरीन तकनीकी क्वालिटी वाले जैवलिन की सख्त जरूरत थी, तब देश के सबसे बड़े स्टार नीरज चोपड़ा ने बिना किसी झिझक के अपना पर्सनल जैवलिन उन्हें इस्तेमाल करने के लिए दे दिया था। एक चैंपियन खिलाड़ी का अपना सबसे कीमती उपकरण किसी अन्य साथी खिलाड़ी को सौंप देना यह साबित करता है कि नीरज चोपड़ा सिर्फ मेडल जीतने की मशीन नहीं हैं, बल्कि वे देश में जैवलिन थ्रो का पूरा इकोसिस्टम मजबूत करना चाहते हैं ताकि भारत के अधिक से अधिक युवा वैश्विक मंच पर तिरंगा फहरा सकें।

एशियन गेम्स मेडलिस्ट रोहित यादव ने बताए नीरज भाई के साथ बिताए गए वे अनमोल पल

रोहित यादव ने आगे बताया कि नीरज चोपड़ा के साथ ट्रेनिंग करना और उनसे तकनीकी बारीकियां सीखना उनके करियर का सबसे टर्निंग पॉइंट रहा है। जब भी रोहित किसी थ्रो के दौरान तकनीक या रन-अप में फंस जाते थे, तो नीरज खुद आगे बढ़कर उन्हें सही एंगल, ग्रिप और शरीर के बैलेंस को सुधारने की सलाह देते थे। नीरज का वह भाला सिर्फ एक खेल उपकरण नहीं था, बल्कि वह रोहित के लिए एक ऐसा प्रेरणास्त्रोत बन गया जिसे हाथ में लेते ही उनके भीतर एक अलग ही आत्मविश्वास और ऊर्जा का संचार हो जाता था। रोहित ने गर्व के साथ कहा कि नीरज भाई का वह सहयोग उनके जीवन भर याद रहने वाला अनुभव है, जिसने उन्हें एशियन गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए मेडल जीतने का मार्ग दिखाया।

भारतीय एथलेटिक्स में बदल रही है तस्वीर: आपसी सहयोग और आधुनिक तकनीक से बुलंद हो रहा देश का भविष्य

खेल विश्लेषकों का मानना है कि नीरज चोपड़ा द्वारा अपने साथी खिलाड़ियों को इस तरह से मेंटॉर करना और अपने संसाधनों को साझा करना भारतीय एथलेटिक्स के सुनहरे दौर की सबसे बड़ी खूबी है। कुछ साल पहले तक भारत में ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स के लिए विश्व स्तरीय उपकरणों की कमी हुआ करती थी, लेकिन आज नीरज चोपड़ा जैसे वैश्विक आइकॉन के आने से न सिर्फ खेल संस्कृति बदली है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों का मानसिक मनोबल भी आसमान छू रहा है। रोहित यादव जैसे प्रतिभावान एथलीट जब इस प्रकार खुले दिल से अपने सीनियर के सहयोग की सराहना करते हैं, तो इससे यह साफ जाहिर होता है कि भारत में जैवलिन थ्रो का भविष्य बेहद सुरक्षित और उज्जवल हाथों में है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में देश के ये जांबाज खिलाड़ी एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।