19 साल के शानदार करियर पर लगा विराम, भारत के टेस्ट कैप नंबर 283 कर्ण शर्मा ने लिया संन्यास
भारतीय क्रिकेट जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। टीम इंडिया के अनुभवी लेग स्पिनर और टेस्ट कैप नंबर 283 हासिल करने वाले कर्ण शर्मा ने अपने लंबे और शानदार क्रिकेट करियर को अलविदा कह दिया है। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी फिरकी का जादू बिखेरने वाले कर्ण शर्मा ने 19 साल लंबे सफर के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। उनके इस फैसले से उनके फैंस और तमाम क्रिकेट प्रेमियों के बीच मायूसी छा गई है, साथ ही उनके योगदान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ऐसा रहा कर्ण शर्मा का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सफर
कर्ण शर्मा ने साल 2014 में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपना डेब्यू किया था। उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड के मैदान पर टेस्ट कैप नंबर 283 सौंपा गया था। दिलचस्प बात यह है कि यह मुकाबला विराट कोहली का बतौर कप्तान पहला टेस्ट मैच था। हालांकि, कड़े मुकाबले के बाद उन्हें टीम में लंबे समय तक मौके नहीं मिल सके, लेकिन उन्होंने भारत के लिए 1 टेस्ट मैच के अलावा 2 एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ODI) और 1 टी20 इंटरनेशनल मैच भी खेला। सीमित अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के बावजूद घरेलू सर्किट में उनका रुतबा हमेशा से एक दिग्गज गेंदबाज का रहा है।
घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में मचाया धमाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही उन्हें ज्यादा मौके न मिले हों, लेकिन घरेलू क्रिकेट में कर्ण शर्मा का प्रदर्शन बेजोड़ रहा है। उन्होंने साल 2007 में रेलवे की तरफ से अपने प्रथम श्रेणी करियर की शुरुआत की थी और इसके बाद विदर्भ तथा आंध्रा जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया। अपने 19 साल के लंबे करियर में उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 97 मैचों में 270 से ज्यादा विकेट झटके और बल्ले से दो शानदार शतक भी जड़े। इसके अलावा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में वह सनराइजर्स हैदराबाद, मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और आरसीबी जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी का हिस्सा रहे। वह लगातार तीन सीजन (2016, 2017, 2018) अलग-अलग टीमों के साथ आईपीएल ट्रॉफी जीतने वाले अनूठे खिलाड़ी हैं।
संन्यास के बाद क्या होगी नई पारी
क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान करते हुए कर्ण शर्मा ने अपने सहयोगियों, विभिन्न क्रिकेट एसोसिएशनों और परिवार का आभार जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ी के रूप में मैदान छोड़ने के बाद अब वह कोचिंग और क्रिकेट से जुड़ी अन्य प्रशासनिक व तकनीकी भूमिकाओं के जरिए खेल की सेवा जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए उनका यह लंबा सफर हमेशा एक प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा कि कैसे संघर्ष और निरंतरता के बल पर लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर खुद को बनाए रखा जाता है।