इमाम उल हक कुछ सीखो... इमाम उल हक से सीखें जज्बा, इंजरी की वजह से ठीक से चल भी नहीं पा रहा था यह खिलाड़ी

इमाम उल हक कुछ सीखो... इमाम उल हक से सीखें जज्बा, इंजरी की वजह से ठीक से चल भी नहीं पा रहा था यह खिलाड़ी

क्रिसमस या किसी फिल्मी स्क्रिप्ट की तरह खेल के मैदान पर कई बार ऐसे अद्भुत और रोमांचक दृश्य देखने को मिल जाते हैं जो सीधे दर्शकों के दिलों में उतर जाते हैं। क्रिकेट के मैदान पर जज्बे और जुनून की एक ऐसी ही हैरान कर देने वाली कहानी इन दिनों सोशल मीडिया और खेल गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। केरल क्रिकेट लीग (Kerala Cricket League) के एक मुकाबले के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। मैदान पर एक खिलाड़ी गंभीर रूप से चोटिल होने के बावजूद अपनी टीम के लिए क्रीज पर डटा रहा। उसकी हालत यह थी कि वह ठीक से अपने पैरों पर चल भी नहीं पा रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी और आखिरी गेंद पर शानदार छक्का लगाकर अपनी टीम को असंभव सी दिखने वाली जीत दिला दी। इस जांबाज पारी को देखने के बाद फैंस सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के खिलाड़ी इमाम उल हक को आड़े हाथों ले रहे हैं और तुलना करते हुए कह रहे हैं कि इस खिलाड़ी से कुछ सीख लेनी चाहिए।

केरल क्रिकेट लीग में दिखा जुनून का अद्भुत नजारा

केरल क्रिकेट लीग के मुकाबलों में इन दिनों रोमांच अपने चरम पर है और युवा तथा अनुभवी खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए मैदान पर जी-जान लगा रहे हैं। ऐसा ही एक मुकाबला खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है, जहां हार और जीत का फैसला आखिरी गेंद पर हुआ। मैच का माहौल बेहद तनावपूर्ण था और दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर चल रही थी। एक समय ऐसा लग रहा था कि मैच पूरी तरह से हाथ से निकल चुका है और टीम की हार तय है, लेकिन तभी मैदान पर एक ऐसे खिलाड़ी ने चमत्कार कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों का यह हौसला यह साबित करता है कि क्रिकेट केवल बल्ले और गेंद का खेल नहीं है, बल्कि यह अटूट जज्बे और कभी हार न मानने वाले आत्मविश्वास का दूसरा नाम है।

गंभीर चोट के कारण चलने में भी लाचार था खिलाड़ी, फिर भी नहीं छोड़ी उम्मीद

मैच के दौरान एक रन लेने या फील्डिंग करने के चक्कर में इस जांबाज खिलाड़ी को गंभीर चोट लग गई। उसकी मांसपेशियों में खिंचाव या पैर में ऐसी चोट थी जिसके कारण उसका खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा था। हालत यह थी कि वह क्रीज पर अपने पैरों पर ठीक से चल तक नहीं पा रहा था और हर कदम उठाने में उसे भारी दर्द का सामना करना पड़ रहा था। आमतौर पर ऐसी गंभीर चोट लगने पर खिलाड़ी मैदान छोड़कर पवेलियन लौट जाते हैं या मेडिकल सहायता लेते हैं, लेकिन इस खिलाड़ी ने अपनी शारीरिक पीड़ा को अपने देश या टीम की जीत के आड़े नहीं आने दिया। लंगड़ाते हुए और दर्द से कराहते हुए भी वह क्रीज पर डटा रहा और अपने साथी खिलाड़ी के साथ मिलकर स्कोरबोर्ड को आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहा।

आखिरी गेंद पर छक्का जड़कर लिखी जीत की इबारत

मुकाबला अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका था और टीम को जीत के लिए आखिरी गेंद पर कड़े रन बनाने की दरकार थी। स्ट्राइक पर वही चोटिल खिलाड़ी मौजूद था जो पैरों से ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। विरोधी टीम के गेंदबाज ने दबाव बनाने के लिए एक बेहतरीन गेंद फेंकी, लेकिन इस जांबाज बल्लेबाज के इरादे कुछ और ही थे। उसने अपने दर्द को दरकिनार करते हुए अपनी पूरी ताकत झोंक दी और बल्ले का बेहतरीन संपर्क बनाते हुए गेंद को मैदान के बाहर छक्के के लिए भेज दिया। गेंद जैसे ही बाउंड्री के पार गई, पूरा स्टेडियम खुशी से झूम उठा और डगआउट में बैठे खिलाड़ी जश्न मनाने के लिए दौड़ पड़े। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि एक पैर से चल न पाने वाला खिलाड़ी आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर अपनी टीम का हीरो बन गया।

सोशल मीडिया पर छाया जज्बा, इमाम उल हक से हो रही है तुलना

इस घटना का वीडियो और स्कोरिंग मोमेंट्स जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए, इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। क्रिकेट फैंस इस खिलाड़ी के अदम्य साहस और जुझारूपन की तारीफ करते थक नहीं रहे हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया यूजर्स पाकिस्तानी बल्लेबाज इमाम उल हक को लेकर मीम्स और तंज कस रहे हैं। फैंस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार खिलाड़ी मामूली चोट या हल्की ऐंठन (cramps) होने पर भी मैदान छोड़ देते हैं या धीमी गति से खेलते हैं, जबकि इस घरेलू लीग के खिलाड़ी ने दिखा दिया कि जज्बा हो तो शरीर की हर सीमा को पार किया जा सकता है। यह साहसी पारी आने वाले लंबे समय तक क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में जिंदा रहेगी और युवाओं को प्रेरणा देती रहेगी।