इतिहास रच दिया गया है! कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का पहला गोल्ड जीतकर त्रिपुरा की बेटी अस्मिता डे ने देश का नाम किया रोशन
खेल के मैदान से एक ऐसी खबर आई है जो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देगी। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की स्टार जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने वो कर दिखाया है, जो आज तक देश का कोई दूसरा जूडो खिलाड़ी नहीं कर पाया था। उन्होंने 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में कनाडा की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो खेल में भारत का यह पहला स्वर्ण पदक (Gold Medal) है।
फाइनल में सडन डेथ का रोमांच और ऐतिहासिक जीत
अस्मिता का यह सफर आसान नहीं था। फाइनल मुकाबले में उनका मुकाबला कनाडा की मजबूत खिलाड़ी हेइडी क्वैच से था। मुकाबला बेहद कड़ा था और दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। आखिरकार, सडन डेथ यानी गोल्डन स्कोर राउंड में अस्मिता ने शानदार दांव खेलते हुए अपनी जीत पक्की की और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया। इससे पहले क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को इप्पोन से और सेमीफाइनल में समर शॉ को युको से मात दी थी।
एथलीट से जूडो चैंपियन बनने की प्रेरणादायक कहानी
त्रिपुरा के छोटे से शहर बेलोनिया से ताल्लुक रखने वाली अस्मिता डे का यहां तक पहुंचने का सफर काफी संघर्ष भरा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि बचपन में वो जूडो खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक एथलीट थीं और 800 मीटर की दौड़ में हिस्सा लिया करती थीं। लेकिन एक डिस्ट्रिक्ट ट्रायल के दौरान उनकी दिलचस्पी जूडो की तरफ गई और उन्होंने इस खेल को ही अपना मकसद बना लिया। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने भोपाल के SAI रीजनल सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में कड़ी ट्रेनिंग ली। वर्तमान में वह सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) डेवलपमेंट ग्रुप का भी अहम हिस्सा हैं।
इससे पहले भी कई बड़े टूर्नामेंट्स में गाड़ चुकी हैं झंडे
अस्मिता की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। इससे पहले भी उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का तिरंगा ऊंचा किया है:
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साल 2025 में मोरक्को में हुए कैसाब्लांका अफ्रीकन ओपन में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था।
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साल 2023 में मकाऊ में आयोजित जूनियर एशिया कप में भी उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।
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साल 2023 के एशियन ओपन में वह सिल्वर मेडल जीतने में सफल रही थीं।
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इसके अलावा खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में कई गोल्ड मेडल और जूनियर नेशनल चैंपियनशिप का खिताब भी उनके नाम है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का मौजूदा प्रदर्शन
अस्मिता डे की इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का हौसला और बढ़ गया है। प्रतियोगिता में भारत अब तक कुल 4 गोल्ड, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल यानी कुल 18 पदकों के साथ अंक तालिका में 9वें स्थान पर बना हुआ है। अस्मिता का यह गोल्ड मेडल निश्चित रूप से भारतीय दल के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है।