बारिश में पानी में फंसकर बंद हो गई है कार? भूलकर भी न करें ये गलती, वरना एक झटके में डूब जाएंगे लाखों रुपये
बरसात का मौसम अपने साथ राहत और सुहाना मौसम लेकर आता है, लेकिन शहरी इलाकों में यह आफत बनकर भी बरसता है। मानसून के इन दिनों में सड़कों पर जलभराव या वाटरप्रॉब्लम होना बेहद आम बात हो गई है। ऐसे में कई बार मजबूरी में या अनजाने में लोग अपनी गाड़ियों को पानी से भरे रास्तों पर उतार देते हैं। अगर आपकी कार भी ऐसे ही किसी रास्ते में फंसकर अचानक बंद हो जाती है, तो यह स्थिति किसी बड़े तनाव से कम नहीं होती। ज्यादातर लोग इस तरह के संकट में घबरा जाते हैं और हड़बड़ाहट में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे कार के इंजन और महंगे पार्ट्स को भारी नुकसान पहुंच जाता है। यदि आप भी मानसून में गाड़ी चलाते हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि ऐसी आपातकालीन स्थिति में आपको क्या करना चाहिए और किन बातों से सख्त परहेज करना चाहिए।
बारिश में पानी में कार बंद होने पर भूलकर भी न करें रीस्टार्ट करने की गलती
जब भी कोई गाड़ी पानी से भरे रास्ते में अचानक बंद होती है, तो ड्राइवर का पहला रिएक्शन यही होता है कि वह चाबी घुमाकर या पुश-बटन दबाकर उसे तुरंत दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश करे। यही वह सबसे बड़ी और खतरनाक गलती है जो आपके इंजन को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकती है। पानी में जाने के बाद जब इंजन बंद होता है, तो उसका मतलब होता है कि एयर इंटेक या साइलेंसर के रास्ते पानी अंदर जाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में जब आप गाड़ी को जबरदस्ती रीस्टार्ट करते हैं, तो इंजन का पिस्टन घूमता है और वह पानी को सक्शन के जरिए सीधे कंबशन चैंबर में खींच लेता है। पानी संपीड़ित (Compress) नहीं हो सकता, जिसके कारण इंजन के रॉड्स मुड़ जाते हैं या ब्लॉक क्रैक हो जाता है। ऑटोमोबाइल की भाषा में इसे 'हाइड्रोलॉक' (Hydrolock) कहा जाता है। हाइड्रोलॉक होने पर इंजन की मरम्मत या उसे पूरी तरह बदलने में लाखों रुपये का खर्च आ सकता है, जो किसी भी कार मालिक के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
तुरंत इग्निशन करें बंद और बचाएं अपनी कार का इलेक्ट्रिकल सिस्टम
जैसी ही आपको यह अहसास हो कि पानी में गाड़ी का इंजन बंद हो चुका है, सबसे पहला काम यह करें कि बिना एक पल गंवाए इग्निशन को पूरी तरह ऑफ कर दें और चाबी बाहर निकाल लें। इसके पीछे का तकनीकी कारण यह है कि आधुनिक कारों में अनगिनत सेंसर्स, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU), वायरिंग हार्नेस और डिजिटल डिस्प्ले होते हैं। अगर गाड़ी बंद होने के बावजूद इग्निशन ऑन रहता है, तो पानी के संपर्क में आने से शॉर्ट सर्किट होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शॉर्ट सर्किट की वजह से कार का पूरा कंप्यूटराइज्ड सिस्टम उड़ सकता है, जिसे ठीक कराना बेहद महंगा और जटिल काम है। इसके अलावा, यदि आपको यह महसूस हो कि आसपास का पानी तेजी से बढ़ रहा है और जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच रहा है, तो बिना देर किए अपनी गाड़ी की खिड़कियां थोड़ी नीचे कर लें। अक्सर पानी के दबाव के कारण इलेक्ट्रॉनिक पावर विंडो काम करना बंद कर देती हैं, इसलिए समय रहते खिड़की खोलना आपको एक सुरक्षित एस्केप रूट दे सकता है।
जान है तो जहाँ है: पानी लगातार बढ़ने पर तुरंत कार से बाहर निकलें
कई बार लोग अपनी प्यारी गाड़ी के प्रति अत्यधिक मोह के कारण खुद को खतरे में डाल लेते हैं। अगर आप किसी ऐसे अंडरपास या जलभराव वाले इलाके में फंसे हैं जहां पानी का स्तर लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है, तो कार के अंदर बैठकर चमत्कार का इंतजार बिल्कुल न करें। पानी का दबाव इतनी तेजी से बढ़ता है कि कुछ ही मिनटों में कार के दरवाजे जाम हो जाते हैं और उन्हें अंदर से खोलना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत अपनी सीट बेल्ट खोलें। यदि दरवाजे नहीं खुल रहे हैं, तो खिड़की के रास्ते बाहर निकलने का प्रयास करें। गाड़ी से बाहर निकलकर किसी भी नजदीकी ऊंची और सुरक्षित जगह पर चले जाएं। याद रखें कि कार की कीमत से ज्यादा कीमती आपकी और आपके परिवार की जान है। गाड़ी को बाद में क्रेन या टोइंग सर्विस की मदद से निकाला जा सकता है, लेकिन जान जोखिम में डालना समझदारी नहीं है।
कार को सुरक्षित और कम पानी वाली जगह पर ले जाने का सही तरीका
यदि जलभराव का स्तर इतना गंभीर नहीं है कि गाड़ी के अंदर पानी घुसने लगे और पानी का बहाव भी बहुत तेज नहीं है, तो आप सूझबूझ से काम ले सकते हैं। ऐसी सुरक्षित परिस्थितियों में कार को न्यूट्रल (Neutral) गियर में डाल दें। इसके बाद यदि संभव हो, तो गाड़ी से उतरकर या किसी अन्य व्यक्ति की मदद से कार को धक्का देकर धीरे-धीरे किसी ऐसे स्थान पर ले जाएं जहां पानी का स्तर काफी कम हो। ऐसा करते समय यह विशेष ध्यान रखें कि पानी का तेज बहाव आपकी गाड़ी को अपने साथ न बहा ले जाए। कम पानी वाली सुरक्षित जगह पर पहुंचने के बाद गाड़ी को किसी भी हाल में खुद स्टार्ट करने की कोशिश न करें। तुरंत अपने शहर के किसी भरोसेमंद और अधिकृत मैकेनिक या सर्विस सेंटर से संपर्क करें। उन्हें पूरी स्थिति की जानकारी दें ताकि वे मौके पर आकर या अपनी देखरेख में गाड़ी की सही तरीके से जांच कर सकें।
टोइंग और कार इंश्योरेंस की मदद लेने में ही है भलाई
जब गाड़ी किसी सुनसान या गहरे पानी वाले रास्ते पर पूरी तरह फंस जाए और वहां से निकालना मुमकिन न हो, तो जबरदस्ती करने के बजाय तुरंत अपनी मोटर इंश्योरेंस कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। आजकल अधिकांश कार इंश्योरेंस पॉलिसी में 'इंजन प्रोटेक्शन कवर' (Engine Protection Cover) या रोडसाइड असिस्टेंस (RSA) शामिल होता है। बीमा कंपनी की अधिकृत टो ट्रक (Tow Truck) सेवा को बुलाएं जो आपकी गाड़ी को सुरक्षित रूप से खींचकर वर्कशॉप तक पहुंचा सके। बीमा अधिकारियों को घटना की वास्तविक तस्वीर और वीडियो साझा करें ताकि क्लेम मिलने में कोई कानूनी अड़चन न आए। बिना पेशेवर जांच के यदि आप लोकल स्तर पर गाड़ी ठीक करवाने की कोशिश करेंगे, तो क्लेम मिलने में दिक्कत आ सकती है। याद रखिए कि पानी में बंद हुई गाड़ी को जब तक पूरी तरह से सुखाया और चेक न किया जाए, तब तक उसकी चाबी इग्निशन में डालना खतरे से खाली नहीं है।
कैसे पहचानें कि इंजन के अंदर पानी पहुंच चुका है या नहीं?
जब आपकी कार को टो करके किसी सुरक्षित गैराज या सर्विस सेंटर पर पहुंचा दिया जाता है, तो मैकेनिक सबसे पहले यह जांच करता है कि इंजन के भीतर पानी गया है या नहीं। इसे चेक करने का सबसे आसान और मुख्य तरीका डिपस्टिक (Dipstick) को बाहर निकालना है। यदि डिपस्टिक बाहर खींचने पर इंजन ऑयल का रंग दूधिया या उसमें पानी की छोटी-छोटी बूंदें और सफेद झाग दिखाई दें, तो यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि इंजन के अंदर नमी या पानी पहुंच चुका है। ऐसे संवेदनशील मामलों में मैकेनिक सबसे पहले स्पार्क प्लग (Petrol Cars के लिए) या फ्यूल इंजेक्टर (Diesel Cars के लिए) को खोलकर बाहर निकालते हैं। इसके बाद क्रैंकशाフト को मैन्युअली घुमाकर चेंबर में जमा हुए सारे पानी को बाहर निकाला जाता है। इंजन ऑयल और ऑयल फिल्टर को पूरी तरह बदला जाता है। जब तक संपूर्ण रूप से पानी को बाहर निकालकर इंजन को सुखाया न जाए, तब तक गाड़ी को दोबारा स्टार्ट करने की भूल बिल्कुल न करें। थोड़ी सी सावधानी और समझदारी अपनाकर आप न सिर्फ अपनी कार को बड़े और भारी नुकसान से बचा सकते हैं, बल्कि हजारों-लाखों रुपये के रिपेयरिंग खर्च से भी राहत पा सकते हैं।