FIFA World Cup 2026: फुटबॉल महाकुंभ में बजेगी 750 गानों की धुन, जानें कैसे तैयार होती है हर देश की 'स्टेडियम प्लेलिस्ट'
फीफा विश्वकप (FIFA World Cup) 2026 अब सिर्फ फुटबॉल का एक टूर्नामेंट नहीं रह गया है, बल्कि यह खेल, वैश्विक संगीत और दुनिया भर के फैंस की भावनाओं का एक महा-उत्सव बन चुका है। स्टेडियम में खिलाड़ियों के मैदान पर उतरने से लेकर, गोल होने के जश्न और मैच खत्म होने तक गूंजने वाले गानों का मकसद सिर्फ मनोरंजन करना नहीं होता। इनका असली काम खिलाड़ियों में जोश भरना और दर्शकों के बीच एक अटूट जुड़ाव बनाना है। यही वजह है कि फीफा ने इस बार हर टीम के लिए एक अलग स्टेडियम साउंडट्रैक तैयार किया है।
स्टेडियम में कौन तय करता है कि कौन-सा गाना बजेगा?
विश्वकप के दौरान बजने वाले गानों का फैसला फीफा (FIFA) अकेले बंद कमरों में नहीं करता। इसके लिए एक बेहद लोकतांत्रिक और संगठित प्रक्रिया अपनाई जाती है:
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संयुक्त टीम वर्क: फीफा की स्टेडियम एंटरटेनमेंट टीम, टूर्नामेंट में भाग ले रहे सभी 48 देशों की फुटबॉल एसोसिएशन, खुद खिलाड़ी और स्थानीय आयोजन समिति मिलकर गानों का चयन करती है।
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सांस्कृतिक पहचान: हर देश की फुटबॉल एसोसिएशन अपनी संस्कृति, इतिहास और फुटबॉल पहचान को दर्शाने वाले गानों की एक आधिकारिक सूची फीफा को भेजती है।
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खिलाड़ियों की पसंद: वार्म-अप (Warm-up), गोल सेलिब्रेशन (Goal Celebration) और मैच जीतने के बाद बजने वाले कुछ खास गानों को खुद खिलाड़ी अपनी पसंद के आधार पर चुनते हैं। यदि किसी गाने पर फैंस का रिस्पॉन्स शानदार रहता है, तो उसे आगामी मैचों की प्लेलिस्ट में भी जगह मिलती है।
750 से ज्यादा गानों का म्यूजिक बैंक कैसे हुआ तैयार?
रॉयटर्स (Reuters) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के विश्वकप के लिए 750 से ज्यादा गानों का एक विशाल म्यूजिक कलेक्शन तैयार किया गया है। फीफा इस महा-प्लेलिस्ट को तैयार करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाता है:
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घरेलू लीग की स्टडी: फीफा सबसे पहले भाग लेने वाले देशों की घरेलू फुटबॉल लीग (जैसे इंग्लिश प्रीमियर लीग, ला लीगा आदि) में बजने वाले गानों और चैंट्स (नारों) की गहराई से स्टडी करता है।
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फैंस का जुड़ाव: यह देखा जाता है कि कौन-से गानों को गाते समय फैंस सबसे ज्यादा झूमते हैं और किन धुनों से खिलाड़ियों का मोटिवेशन बढ़ता है।
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सिचुएशनल प्लेलिस्ट: इसके बाद मैच के अलग-अलग चरणों जैसे— टीम लाइन-अप, वार्म-अप, गोल होने के तुरंत बाद और मैच खत्म होने (Full-time) के लिए अलग-अलग सब-प्लेलिस्ट बनाई जाती है।
हर टीम का क्यों होता है अपना अलग 'सिग्नेचर म्यूजिक'?
दुनिया के हर देश की अपनी अनूठी संस्कृति, भाषा और फुटबॉल की अलग परंपराएं हैं। फीफा हर टीम के लिए अलग स्टेडियम साउंडट्रैक इसलिए तैयार करता है ताकि खिलाड़ियों को सात समंदर पार भी अपने घर (Homeland) जैसा माहौल मिल सके।
इसके अलावा, जिन देशों में फुटबॉल संस्कृति अभी नई है या तेजी से विकसित हो रही है, वे इन खास गानों और धुनों के जरिए अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी एक नई पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। यह संगीत समय के साथ उस देश की अपनी फुटबॉल विरासत का एक अहम हिस्सा बन जाता है।
मनोवैज्ञानिक स्तर पर खिलाड़ियों और फैंस को बूस्ट करता है संगीत
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर सही बीट्स का बजना खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के मनोविज्ञान पर गहरा और सकारात्मक असर डालता है।
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खिलाड़ियों के लिए: मैच से पहले वार्म-अप के दौरान बजने वाले हाई-रैपिड (तेज रफ्तार) गाने खिलाड़ियों के एड्रेनालाईन रश ($Adrenaline\ Rush$) को बढ़ाते हैं और उन्हें मानसिक रूप से मुकाबले के लिए तैयार करते हैं।
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फैंस के लिए: गोल होने के बाद जब पूरा स्टेडियम एक ही धुन पर एक साथ गाता है, तो दर्शकों का जुड़ाव और जोश चरम पर पहुंच जाता है, जो मैच डे के अनुभव को ताउम्र के लिए यादगार बना देता है।
'वाका वाका' से लेकर के-पॉप और टेक्नो तक: बदल गया वर्ल्ड कप का संगीत
एक दौर था जब शुरुआती वर्ल्ड कप मैचों में केवल कुछ पारंपरिक नारे या चुनिंदा धुनें ही सुनाई देती थीं। साल 2010 में शकीरा के 'वाका वाका' ($Waka\ Waka$) और के'नान के 'वेविंग फ्लैग' ($Wavin'\ Flag$) जैसे गानों ने वर्ल्ड कप संगीत की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल दिया।
आज 2026 के विश्वकप की आधिकारिक प्लेलिस्ट में रॉक, पॉप, कोरियन के-पॉप (K-Pop), लातिनो रेगेटन, टेक्नो और पारंपरिक लोक संगीत (Folk Music) का एक अद्भुत फ्यूजन देखने को मिल रहा है। यह विविधता फीफा विश्वकप को सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वैश्विक संस्कृतियों और कला का सबसे बड़ा मंच बनाती है।