रफ़्तार भी, और जान भी: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर तैयार हुआ एशिया का सबसे बड़ा 'वाइल्डलाइफ कॉरिडोर'
अक्सर हम सुनते हैं कि तरक्की की राह में प्रकृति की बलि चढ़ जाती है। सड़कें बनती हैं, तो जंगल कटते हैं और बेजुबान जानवर गाड़ियों की चपेट में आ जाते हैं। लेकिन भारत में एक ऐसा हाईवे बनकर तैयार हो रहा है, जिसने पूरी दुनिया के सामने विकास और पर्यावरण के संतुलन की एक नई मिसाल पेश की है।
हम बात कर रहे हैं दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की। इस हाईवे की सबसे खास बात इसकी रफ़्तार नहीं, बल्कि एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर (Wildlife Corridor) है। यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि अगर नीयत साफ़ हो, तो जंगल और कंक्रीट एक साथ रह सकते हैं।
गाड़ियां ऊपर और हाथी नीचे: क्या है यह कॉरिडोर?
जरा कल्पना कीजिये, आप अपनी कार में फर्राटे भर रहे हैं और आपके टायरों के ठीक नीचे, पुल के साये में हाथी, बाघ और तेंदुए अपने कुदरती घर में मजे से टहल रहे हैं। सुनने में यह किसी फिल्म का सीन लगता है, लेकिन उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क में यह हकीकत बन चुका है।
NHAI ने भारतमाला परियोजना के तहत यहाँ करीब 12 से 14 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर (खंभों पर टिकी सड़क) बनाया है। मकसद साफ़ है-इंसानों को रास्ता मिले, लेकिन जानवरों की राह न रुके। चूंकि राजाजी पार्क में 400 से ज्यादा हाथी और दर्जनों बाघ रहते हैं, इसलिए उन्हें सड़क पार करते वक्त होने वाले हादसों से बचाना जरूरी था।
जानवरों को डिस्टर्ब न करने वाली 'इंजीनियरिंग'
इस कॉरिडोर को बनाने में गजब की तकनीक इस्तेमाल की गई है:
- शांति का ख्याल: जानवरों को गाड़ियों के शोर से दिक्कत न हो, इसके लिए खास तरह के 'साउंड बैरियर' लगाए गए हैं।
- पीली रौशनी: रात के वक्त जानवरों की आंखों में गाड़ियों की लाइट न चुभे और उनकी नींद खराब न हो, इसके लिए यहाँ केवल पीली लाइटों का इस्तेमाल किया गया है।
- 6 मीटर ऊंचा रास्ता: हाथियों की लम्बाई को देखते हुए अंडरपास को 6 मीटर से ज्यादा ऊंचा रखा गया है ताकि वे सिर उठाकर शान से निकल सकें।
दिल्ली से देहरादून: अब 6 घंटे नहीं, सिर्फ 2.5 घंटे!
सिर्फ जानवरों के लिए ही नहीं, यह एक्सप्रेसवे हम जैसे मुसाफिरों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।
पहले दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून पहुँचने में जहां 6-7 घंटे लगते थे, अब यह सफर सिमटकर महज 2.5 घंटे का रह जाएगा। करीब 210 किलोमीटर लंबे इस हाईवे पर आपको 6 से 12 लेन की चौड़ाई मिलेगी। इसका पहला फेज (दिल्ली-बागपत) ट्रायल के लिए तैयार है, और पूरी पिक्चर फरवरी 2026 तक क्लियर हो जाएगी जब यह जनता के लिए पूरी तरह खुल जाएगा।
क्यों ख़ास है यह प्रोजेक्ट?
- कुल लागत: 13,000 करोड़ रुपये।
- सुविधाएं: हर 25 किलोमीटर पर खाने-पीने और आराम करने की जगह (फूड कोर्ट और रेस्ट एरिया)।
- सुरंग: डाटकाली मंदिर के पास 340 मीटर लंबी सुरंग, जिससे पहाड़ों के छोटे जानवरों को भी रास्ता मिले।
कुल मिलाकर, यह कॉरिडोर एक उम्मीद है। उम्मीद इस बात की कि हम अपनी सुविधा के लिए जंगलों का रास्ता तो ले सकते हैं, लेकिन उन जंगलों के असली मालिकों (जानवरों) को बेघर किए बिना। वन्यजीव संस्थान के कैमरों ने दिखाया है कि हाथियों ने इस नए रास्ते को अपनाना भी शुरू कर दिया है, जो सबसे बड़ी सफलता है।