झारखंड में सियासी भूचाल की आहट: क्या सोरेन थामेंगे बीजेपी का हाथ? जानिए दिल्ली में पकी 'खिचड़ी' का सच
झारखंड की राजनीति में इस वक्त जो चल रहा है, उसने रांची से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा दिया है। एक तरफ कड़ाके की ठंड है और दूसरी तरफ राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की एक 'चुप्पी' ने माहौल गरमा दिया है। पिछले कुछ दिनों से सीएम सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। खबर है कि वे आज, यानी 3 दिसंबर को वापस रांची लौट रहे हैं, लेकिन क्या वो अपने साथ झारखंड के लिए कोई 'नया सियासी फरमान' लेकर आ रहे हैं?
कयासों का बाजार इसलिए गर्म है क्योंकि इसी बीच राज्यपाल संतोष गंगवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। राजनीति में जब राज्यपाल और गृह मंत्री मिलते हैं और राज्य का मुख्यमंत्री भी उसी वक्त दिल्ली में हो, तो समझ लीजिये कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा चल रहा है।
क्या बीजेपी के साथ सरकार बनाएंगे सोरेन? (गणित समझिए)
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हेमंत सोरेन बीजेपी के साथ जाने का मन बना सकते हैं। अगर हम विधानसभा के गणित को देखें, तो यह संभव भी दिखता है।
अभी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास 34 सीटें हैं और बीजेपी के पास 21 सीटें हैं।
अगर ये दोनों साथ आ जाएं, तो साथ में AJSU, JDU और LJP के एक-एक विधायक को मिलाकर यह आंकड़ा 58 तक पहुंच जाता है। बहुमत के लिए 41 सीटें चाहिए, यानी सरकार बहुत आराम से चलेगी।
कांग्रेस में टूट का डर?
सबसे ज्यादा बैचेनी कांग्रेस खेमे में है। चर्चा है कि कांग्रेस के 16 विधायकों में से कम से कम 8 विधायक पाला बदलने के लिए तैयार बैठे हैं। वे सोरेन के नए गठबंधन को बाहर से समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, कानून (Anti-Defection Law) कहता है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई से कम विधायक टूटते हैं, तो उनकी सदस्यता जा सकती है। कांग्रेस को तोड़ने के लिए कम से कम 11 विधायकों का अलग होना ज़रूरी है। खबर है कि बातचीत का दौर जारी है और अगले दो दिनों में तस्वीर साफ हो जाएगी।
आखिर सोरेन ऐसा क्यों करेंगे? (वजह क्या है?)
राजनीति में कोई भी फैसला बिना नफा-नुकसान के नहीं होता। सोरेन के इस संभावित कदम के पीछे तीन बड़ी वजहें मानी जा रही हैं:
- 'इंडिया' गठबंधन से नाराजगी: JMM को बिहार चुनावों में 'इंडिया' अलायंस से जो उम्मीद थी, वो पूरी नहीं हुई। उन्हें 16 सीटें चाहिए थीं, लेकिन आरजेडी और कांग्रेस ने उन्हें भाव नहीं दिया। इससे सोरेन आहत बताए जा रहे हैं।
- ED की तलवार और नया कानून: सीएम सोरेन पर ईडी के पुराने मामलों की तलवार लटकी है। वहीं, अगस्त में संसद में एक ऐसा बिल पेश हुआ था जिसके मुताबिक गिरफ्तारी के 31वें दिन सीएम की कुर्सी अपने आप जा सकती है। सोरेन इस जोखिम को कम करना चाहते हैं और केंद्र के साथ अच्छे रिश्तों में ही उन्हें बचाव दिख रहा है।
- शिबू सोरेन को 'भारत रत्न': यह एक बहुत बड़ा इमोशनल कार्ड हो सकता है। चर्चा है कि केंद्र सरकार दिवंगत दिशोम गुरु और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (जिनका अगस्त में निधन हुआ था) को 'भारत रत्न' देने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है, तो यह जेएमएम के लिए बहुत बड़े सम्मान की बात होगी।
कहा जा रहा है कि नई डील में डिप्टी सीएम पद पर भी बात चल रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हेमंत सोरेन रांची पहुँचते ही क्या ऐलान करते हैं। क्या वाकई झारखंड में तख्तापलट होगा या यह सिर्फ एक दबाव बनाने की राजनीति है? अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं।