Som Pradosh Vrat : 17 या 18 नवंबर? जानिए सही तारीख और पूजा का समय, ताकि पूजा का पूरा फल मिले
News India Live, Digital Desk: जब भी कोई त्योहार या व्रत आता है, तो अक्सर उसकी तारीख को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन हो जाता है। ऐसा ही कुछ इस बार मार्गशीर्ष महीने के पहले प्रदोष व्रत को लेकर हो रहा है। बहुत से लोग सोच रहे हैं कि सोम प्रदोष का व्रत 17 नवंबर को रखें या 18 नवंबर को।
अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो आइए इस कन्फ्यूजन को दूर करते हैं और जानते हैं कि भगवान शिव को समर्पित यह महत्वपूर्ण व्रत किस दिन रखना सही है।
क्या होता है प्रदोष व्रत?
प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं - एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को होता है और इसकी पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है। जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष कहते हैं, जिसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि सोम प्रदोष का व्रत करने से भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती भी प्रसन्न होती हैं और हर मनोकामना पूरी करती हैं।
किस दिन रखें व्रत - 17 या 18 नवंबर?
हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 17 नवंबर, सोमवार को सुबह 08:52 बजे शुरू होगी और 18 नवंबर, मंगलवार को सुबह 10:28 बजे समाप्त होगी।
प्रदोष व्रत का नियम यह है कि इसकी पूजा 'प्रदोष काल' यानी सूर्यास्त के बाद के समय में की जाती है।
- 17 नवंबर को त्रयोदशी तिथि पूरे प्रदोष काल में रहेगी।
- वहीं, 18 नवंबर को सूर्योदय के बाद ही त्रयोदशी तिथि समाप्त हो जाएगी।
इसलिए, शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत उसी दिन रखना चाहिए जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि हो। इस हिसाब से, सोम प्रदोष का व्रत 17 नवंबर, 2025, सोमवार को ही रखना सही और फलदायी होगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
17 नवंबर को भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे अच्छा समय शाम 05:58 बजे से रात 08:34 बजे तक रहेगा। इस दौरान आप भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा करके उनका आशीर्वाद पा सकते हैं।
तो अब कन्फ्यूजन को दूर कीजिए और 17 नवंबर को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ सोम प्रदोष का व्रत रखिए।