लखनऊ में ब्राह्मण महाकुंभ UGC के नए नियमों पर भड़का समाज, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दिया बड़ा आश्वासन

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News India Live, Digital Desk: लखनऊ के विश्वेश्वरैया हॉल में आयोजित 'ब्राह्मण महासम्मेलन' में समाज की चिंताओं और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में सबसे ज्यादा चर्चा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए उन नियमों पर हुई, जिन्हें ब्राह्मण समाज अपने हितों के खिलाफ मान रहा है।

UGC विवाद: आखिर क्यों नाराज है ब्राह्मण समाज?

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने यूजीसी के हालिया दिशा-निर्देशों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। आरोप है कि नए नियमों के कारण उच्च शिक्षा और शिक्षण संस्थानों में समाज के युवाओं के लिए अवसर कम हो रहे हैं। वक्ताओं का कहना था कि योग्यता के आधार पर मिलने वाले पदों और नियुक्तियों में पारदर्शिता की कमी आ रही है, जिससे मेधावी छात्र पीछे छूट रहे हैं। मंच से मांग की गई कि सरकार को तुरंत इन नियमों की समीक्षा करनी चाहिए।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का रुख: "हम आपकी चिंता समझते हैं"

समाज के आक्रोश को देखते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "ब्राह्मण समाज हमेशा से राष्ट्र निर्माण का पथप्रदर्शक रहा है। हम आपकी चिंताओं और यूजीसी से जुड़ी दुविधाओं को भली-भांति समझते हैं।" उन्होंने आश्वासन दिया कि समाज की हर जायज मांग को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा। पाठक ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने देगी।

राजनीतिक ताकत का अहसास: 2027 की तैयारी?

जानकारों का मानना है कि लखनऊ में हुई यह जुटना महज एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं था। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या और उनकी राजनीतिक पैठ को देखते हुए, इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। सम्मेलन में यह संदेश देने की कोशिश की गई कि अगर समाज की अनदेखी हुई, तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।

सम्मेलन की प्रमुख मांगें:

UGC नियमों में संशोधन: उच्च शिक्षा में मेरिट और निष्पक्षता को प्राथमिकता देना।

ब्राह्मण आयोग का गठन: समाज की समस्याओं के समाधान के लिए एक अलग निकाय की मांग।

मंदिरों का संरक्षण: पुजारियों और धार्मिक स्थलों के कल्याण के लिए विशेष योजनाएं।