BREAKING:
March 26 2026 10:53 pm

Skin Brightening: क्या ग्लूटाथियोन सच में चेहरे को गोरा बनाता है? जानें इस मिरेकल ड्रिप का पूरा सच और साइड इफेक्ट्स

Post

News India Live, Digital Desk: पिछले कुछ समय से बॉलीवुड सितारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बीच 'ग्लूटाथियोन' (Glutathione) शब्द की खूब चर्चा है। इसे 'स्किन लाइटनिंग' का जादुई नुस्खा बताया जा रहा है। बाजार में इसके साबुन, क्रीम, सप्लीमेंट्स और यहां तक कि 'इंट्रावेनस (IV) ड्रिप्स' की बाढ़ आ गई है। लेकिन क्या यह वाकई त्वचा की रंगत बदल सकता है या यह सिर्फ एक मार्केटिंग मिथ है? आइए जानते हैं क्या कहते हैं त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologists) और विज्ञान।

क्या है ग्लूटाथियोन? (What is Glutathione)

ग्लूटाथियोन हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक शक्तिशाली 'एंटी-ऑक्सीडेंट' है, जो लीवर में बनता है।

मुख्य काम: यह शरीर से जहरीले तत्वों (Toxins) को बाहर निकालने, कोशिकाओं की मरम्मत करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है।

स्किन कनेक्शन: यह त्वचा के रंग के लिए जिम्मेदार पिगमेंट 'मेलेनिन' (Melanin) के उत्पादन को धीमा कर देता है, जिससे त्वचा की रंगत हल्की नजर आने लगती है।

चमत्कार या मिथक: क्या यह रंग गोरा करता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लूटाथियोन त्वचा को 'गोरा' (White) नहीं करता, बल्कि यह 'स्किन ब्राइटनिंग' (Skin Brightening) में मदद करता है।

पिगमेंटेशन में कमी: यह सन डैमेज, डार्क स्पॉट्स और मेलास्मा (झाइयां) को कम करने में प्रभावी हो सकता है।

असमान रंगत: यह त्वचा की टोन को एकसमान (Even tone) बनाता है और चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक लाता है।

नतीजे: इसके परिणाम स्थायी नहीं होते और सप्लीमेंट्स बंद करने के कुछ समय बाद त्वचा अपनी पुरानी रंगत में लौटने लगती है।

IV ड्रिप्स और इंजेक्शन: कितने सुरक्षित?

आजकल क्लिनिक्स में 'ग्लूटाथियोन ड्रिप्स' का चलन बढ़ा है, लेकिन FDA (U.S. Food and Drug Administration) ने स्किन लाइटनिंग के लिए इसके इंजेक्शन के इस्तेमाल को मंजूरी नहीं दी है।

जोखिम: बिना डॉक्टरी सलाह के हाई-डोज इंजेक्शन लेने से लीवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

एलर्जी: इससे त्वचा पर चकत्ते (Rashes) और स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं।

ग्लूटाथियोन के संभावित साइड इफेक्ट्स

पाचन संबंधी समस्या: जी मिचलाना, पेट फूलना या ऐंठन।

किडनी पर दबाव: लंबे समय तक सप्लीमेंट्स लेने से गुर्दों पर बुरा असर पड़ सकता है।

थायराइड फंक्शन: यह शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है।

सफेद बाल: कुछ मामलों में यह शरीर के अन्य हिस्सों के मेलेनिन को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे बाल सफेद होने की संभावना रहती है।

प्राकृतिक रूप से कैसे बढ़ाएं ग्लूटाथियोन?

महंगे और रिस्की ट्रीटमेंट के बजाय आप अपनी डाइट के जरिए इसे बढ़ा सकते हैं:

सल्फर युक्त फूड्स: लहसुन, प्याज और ब्रोकली।

विटामिन-C: संतरा, नींबू और आंवला ग्लूटाथियोन के अवशोषण (Absorption) में मदद करते हैं।

पर्याप्त नींद: कम सोने से शरीर में ग्लूटाथियोन का स्तर तेजी से गिरता है।