Shri Krishna's Pampering: जन्माष्टमी पर आठ बार भोग लगाने की अनूठी विधि और इसके लाभ

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News India Live, Digital Desk: Shri Krishna's Pampering: कृष्ण जन्माष्टमी, जिसे इस साल 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा, भगवान श्री कृष्ण के जन्म का पर्व है, और यह तिथि उनके भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन भक्तजन भगवान को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं. जन्माष्टमी के मौके पर भगवान कृष्ण को 8 बार भोग लगाने की एक खास परंपरा है, जिसका विशेष महत्व है. यह सिर्फ एक साधारण भोग नहीं, बल्कि भगवान के प्रति अगाध प्रेम, समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है, और इसके पीछे कई पौराणिक मान्यताएं और आध्यात्मिक महत्व छिपे हैं. 

यह परंपरा इस बात को दर्शाती है कि भगवान को बच्चे के रूप में कितना लाड़-दुलार किया जाता है और उनकी कितनी परवाह की जाती है.  मान्यता है कि बाल गोपाल को बार-बार भूख लगती है, इसलिए उन्हें हर थोड़ी देर में भोग चढ़ाया जाता है, जैसे एक बच्चे की जरूरतों का ध्यान रखा जाता है. इससे भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करते हैं. यह अष्टप्रहर भोग लगाने की विधि इस भावना पर आधारित है कि कृष्ण जन्म से लेकर उनके बचपन की लीलाओं तक हर क्षण भक्तों की प्रेममय भक्ति से बंधे हैं.

हर प्रहर यानी हर तीन घंटे में, भगवान कृष्ण को भोग लगाने का विधान है. पहला भोग सूर्योदय के साथ बालगोपाल को सुबह दिया जाता है, और उसके बाद दिन भर और रात के समय तक आठ बार उन्हें अलग-अलग प्रकार के पकवान अर्पित किए जाते हैं. इस भोग में मुख्य रूप से भगवान को पसंद आने वाली चीजें शामिल होती हैं, जैसे मक्खन-मिश्री, दूध से बने उत्पाद, विभिन्न मिठाइयां, फल और दही. ये सभी भोग कृष्ण के प्रति अनूठी आस्था को प्रदर्शित करते हैं. यह भी माना जाता है कि कृष्ण जी बचपन से लेकर बड़े होने तक अठखेलियाँ और लीलाएँ करते रहे, इसीलिए उनके प्रति भक्ति में कोई कमी न आए, इसके लिए आठ बार भोग लगाया जाता है. 

आठ बार भोग लगाने की यह परंपरा शुभ मानी जाती है और इसके कई आध्यात्मिक और धार्मिक लाभ भी होते हैं. इस विधि से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है, घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और भक्तों को कष्टों से मुक्ति मिलती है. साथ ही, इससे नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. ऐसा करने से भक्त को मानसिक शांति और आंतरिक प्रसन्नता मिलती है. इस दिन भक्त श्री कृष्ण की भक्ति में लीन होकर दिन-रात उनकी स्तुति करते हैं और इस परंपरा को निभाकर उनसे अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करते हैं. 

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